पंजाब में अध्यापकों को गैर-शैक्षणिक ड्यूटी से बड़ी राहत, DCs को सख्त आदेश जारी
punjabkesari.in Friday, Sep 25, 2026 - 02:02 PM (IST)
अमृतसर (दलजीत) : स्कूलों में पढ़ाई का स्तर और विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसे लेकर पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ने अध्यापकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में न लगाने के संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। विभाग द्वारा राज्य के सभी डिप्टी कमिश्नरों को जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि स्कूल शिक्षा विभाग के अध्यापकों को कानून के अनुसार स्वीकृत कार्यों के अलावा किसी भी गैर-शैक्षणिक या प्रशासनिक कार्य के लिए न तो मांगा जाए और न ही तैनात किया जाए। जारी पत्र में विभाग ने कहा है कि यह बात सामने आई है कि स्कूल शिक्षा विभाग के अध्यापकों को जिला और उप-मंडल स्तर पर विभिन्न प्रशासनिक एवं अन्य गैर-शिक्षण कार्यों के लिए लंबे समय तक तैनात किया जा रहा है। विभाग ने इस मामले को तुरंत ध्यान देने योग्य बताते हुए ऐसी तैनाती पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
30 सितम्बर के बाद अध्यापकों को वापस स्कूलों में भेजने के निर्देश
पत्र में मतदाता सूचियों के विशेष संशोधन की प्रक्रिया का भी जिक्र किया गया है। विभाग ने कहा है कि बड़ी संख्या में अध्यापकों को इस कार्य के लिए तैनात किया गया है। यह प्रक्रिया 30 सितम्बर को पूरी होनी है, इसलिए इसके बाद आवश्यकता से अधिक समय के लिए अध्यापकों को स्कूलों से बाहर तैनात न रखा जाए और उन्हें पुनः अपनी मुख्य शिक्षण जिम्मेदारियां संभालने के लिए स्कूलों में भेजा जाए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अध्यापकों की लगातार स्कूलों से बाहर विभिन्न कार्यों के लिए तैनाती से कक्षाओं की पढ़ाई, शिक्षा की निरंतरता और छात्रों के सीखने के परिणाम प्रभावित हो रहे हैं। अध्यापक की मुख्य जिम्मेदारी छात्रों को पढ़ाना है। बार-बार अध्यापकों को स्कूलों से बाहर भेजने से पढ़ाई का जो समय खराब होता है, उसकी बाद में पूरी भरपाई करना संभव नहीं होता।
सिर्फ 3 तरह के कार्यों के लिए ही लग सकेगी अध्यापकों की ड्यूटी
शिक्षा विभाग ने जारी निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 और संबंधित अदालती निर्देशों के अनुसार अध्यापकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए तैनात नहीं किया जाना चाहिए। कानून के अनुसार अध्यापकों को केवल चुनाव, जनगणना और आपदा प्रबंधन से संबंधित कार्यों के लिए ही तैनात किया जा सकता है। विभाग ने यह भी कहा है कि इन स्वीकृत कार्यों के लिए भी अध्यापकों की तैनाती कम से कम आवश्यकता के अनुसार ही की जाए।
स्कूल समय के बाद करवाई जाए मंजूरशुदा ड्यूटी
विभाग ने डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश दिया है कि जहां भी संभव हो, मंजूरशुदा ड्यूटियां अध्यापकों से स्कूल समय के बाद या गैर-शिक्षण वाले दिनों में करवाई जाएं। इससे पहले उपलब्ध गैर-शिक्षण कर्मचारियों के उपयोग को प्राथमिकता दी जाए। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो अध्यापक पहले से ही चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, उन पर इसके साथ अन्य जिला स्तरीय गैर-संबंधित कार्यों का अतिरिक्त बोझ न डाला जाए।
सर्वेक्षण और तस्दीक के कार्यों के लिए भी अध्यापकों की मांग पर रोक
सभी डिप्टी कमिश्नरों को कहा गया है कि वे अपने अधीन आने वाले जिला और उप-मंडल स्तर के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करें कि अध्यापकों को सर्वेक्षण, तस्दीक या अन्य सामान्य प्रशासनिक कार्यों के लिए न मांगा जाए जब तक कि ऐसा कार्य कानून के अनुसार मंजूरशुदा श्रेणी में न आता हो।
विशेष मामले में शिक्षा विभाग की पूर्व मंजूरी अनिवार्य
शिक्षा विभाग ने अपने आदेशों में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि उपरोक्त मंजूरशुदा कार्यों के अलावा किसी विशेष मामले में अध्यापकों की तैनाती की आवश्यकता पड़ती है तो स्कूल शिक्षा विभाग की पहले मंजूरी लेनी होगी। विभाग ने सभी डिप्टी कमिश्नरों को इन निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने को कहा है। नए आदेशों से अध्यापकों को लंबे समय तक स्कूलों से बाहर गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने की प्रथा पर रोक लगने का रास्ता साफ हो गया है और अध्यापकों का मुख्य ध्यान पुनः छात्रों की पढ़ाई पर केंद्रित करने पर जोर दिया गया है।

