पंजाब में रेलवे विकास को लेकर बोले रवनीत बिट्टू, कहा- बदल रही राज्य की तस्वीर

punjabkesari.in Tuesday, May 12, 2026 - 05:38 PM (IST)

पंजाब डेस्क: पंजाब में रेल विकास को लेकर केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू बड़ी परियोजनाएं गिनई है। उन्होंने कहा कि, भारतीय रेलवे राष्ट्र के लिए केवल एक परिवहन माध्यम नहीं रहा है। जहां-जहां रेल कनेक्टिविटी पहुंचती है, वहां-वहां विकास अपने आप पहुंच जाता है। उद्योग बढ़ते हैं, व्यापार का विस्तार होता है, पर्यटन फलता-फूलता है और आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार आता है। आज पंजाब ठीक इसी प्रकार के परिवर्तन का साक्षी बन रहा है, एक ऐसा रेलवे पुनर्जागरण, जो राज्य के आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य को नई दिशा दे रहा है।

दशकों तक पंजाब को नुकसान उठाना पड़ा क्योंकि कई महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाएं फाइलों में ही फंसी रहीं। नौकरशाही बाधाएं, समन्वय की कमी और निरंतर राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव के कारण अनेक परियोजनाएं वर्षों तक “फ्रीज” अवस्था में पड़ी रहीं। मालवा क्षेत्र, सीमावर्ती जिले, औद्योगिक क्षेत्र और धार्मिक केंद्र आधुनिक रेल अवसंरचना से वंचित रहे, जबकि जनता लगातार इसकी मांग करती रही। सबसे बड़ी विडंबना यह थी कि पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ का पूरे मालवा क्षेत्र से किसी आधुनिक रेल कॉरिडोर के माध्यम से सीधा संपर्क नहीं था। राजपुरा-मोहाली रेल लिंक, जिसकी परिकल्पना पहली बार 1970 के दशक में की गई थी, लगातार जनप्रतिनिधियों और नेताओं द्वारा प्रयास किए जाने के बावजूद दशकों तक लंबित रहा। इसी प्रकार, कादियां-ब्यास रेल लाइन भी भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक देरी के कारण वर्षों तक ठप पड़ी रही।

रवनीत बिट्टू ने आगे कहा कि, स्थिति में बदलाव माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू हुआ। अवसंरचना आधारित विकास और क्षेत्रीय संतुलन की उनकी सोच के मार्गदर्शन में पंजाब के रेलवे विकास को अभूतपूर्व प्राथमिकता मिली। मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ कि केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन मिला, जिनकी सक्रिय कार्यशैली ने पंजाब की लंबित रेलवे आकांक्षाओं को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि, जब मैंने रेल राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली, तब मैंने पंजाब से जुड़ी हर प्रमुख लंबित रेलवे परियोजना की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा की, मण्डल स्तर से लेकर रेलवे बोर्ड मुख्यालय तक। मैंने पाया कि अनेक परियोजनाएं राज्य सरकार की लागत साझेदारी, भूमि अधिग्रहण विवादों और लंबी प्रक्रियात्मक देरी के कारण लगभग ठप हो चुकी थीं। पंजाब की वित्तीय स्थिति को समझते हुए मैंने जोरदार तरीके से यह पक्ष रखा कि भारतीय रेलवे स्वयं परियोजना लागत वहन करते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाए। विस्तृत चर्चाओं, लगातार फॉलो-अप और मण्डलों, जोनल रेलवे तथा रेलवे बोर्ड के बीच समन्वय के बाद कई वर्षों से लंबित परियोजनाएं अंततः पुनर्जीवित हुईं और तेजी से आगे बढ़ाई गईं।

रवनीत बिट्टू ने आगे कहा कि, आज पंजाब उस स्तर का रेलवे विकास देख रहा है, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया। पंजाब के लिए रेलवे बजट आवंटन बढ़कर 2026-27 में 5,673 करोड़ रुपए हो गया है, जो 2009-14 की औसत वार्षिक राशि से लगभग 25 गुना अधिक है। वर्तमान में राज्यभर में  26,000 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाएं क्रियान्वयनाधीन हैं। जिन प्रमुख परियोजनाओं को पुनर्जीवित कर गति दी गई, उनमें 13,770 करोड़ रुपए की भनुपल्ली-बेरी नई रेल लाइन परियोजना, 842 करोड़ रुपए की कादियां-ब्यास नई लाइन, 443 करोड़ रुपए की राजपुरा-मोहाली रेल लाइन, 300 करोड़ रुपए की फिरोजपुर-पट्टी नई लाइन तथा 449 करोड़ रुपए की रमन-मौर रेलवे लाइन शामिल हैं। लुधियाना-किला रायपुर और लुधियाना-मुल्लांपुर जैसी महत्वपूर्ण दोहरीकरण परियोजनाएं भी तेजी से प्रगति कर रही हैं। 2,312 करोड़ रुपए की लागत वाली नंगल डैम-तलवाड़ा परियोजना भी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली एक ऐतिहासिक पहल है।

सबसे ऐतिहासिक उपलब्धियों में से एक तलवंडी साबो तक रेलवे कनेक्टिविटी को स्वीकृति और गति मिलना है, जहां तख्त श्री दमदमा साहिब स्थित है। दशकों से सिख धर्म के पांचों तख्तों को रेल संपर्क से जोड़ने की आकांक्षा रही है। विभिन्न दलों के नेताओं ने समय-समय पर यह मुद्दा उठाया, लेकिन प्रगति सीमित रही। आज यह सपना साकार होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। यह केवल एक अवसंरचना परियोजना नहीं, बल्कि दुनियाभर के लाखों श्रद्धालुओं के लिए भावनात्मक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उपलब्धि है। पंजाब में यात्री सुविधाओं का आधुनिकीकरण भी तेजी से हो रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत 30 रेलवे स्टेशनों का विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ पुनर्विकास किया जा रहा है। इनमें माजहा का पवित्र शहर अमृतसर और मालवा का बठिंडा शामिल हैं। लुधियाना, जलंधर, मोहाली, आनंदपुर साहिब और मुक्तसर जैसे प्रमुख स्टेशन व्यापक आधुनिकीकरण से गुजर रहे हैं।  462 करोड़ रुपए की लागत से चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास रेल भूमि विकास प्राधिकरण द्वारा किए जा रहे प्रमुख फ्लैगशिप प्रोजेक्ट्स में से एक है। स्टेशन को ड्यूल स्टेशन बिल्डिंग, विशाल एयर कॉन्कोर्स, फुट ओवर ब्रिज, आधुनिक यात्री लाउंज, रिटेल क्षेत्र, लिफ्ट, एस्केलेटर और बेहतर पार्किंग सुविधाओं के साथ एक आधुनिक ट्रांसपोर्ट हब में बदला जा रहा है। परियोजना में उल्लेखनीय प्रगति हो चुकी है और यह चंडीगढ़ ट्राइसिटी क्षेत्र के यात्रा अनुभव को पूरी तरह बदल देगी।

इसी के साथ पंजाब की रेल कनेक्टिविटी ने प्रीमियम ट्रेन सेवाओं के माध्यम से एक नए युग में प्रवेश किया है। आज राज्य में 6 जोड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें और 1 जोड़ी अमृत भारत एक्सप्रेस संचालित हो रही हैं। फिरोजपुर-नई दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस विशेष रूप से मालवा क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रही। मैंने व्यक्तिगत रूप से इस परियोजना का लगातार अनुसरण किया ताकि सीमावर्ती जिलों और मालवा क्षेत्र को राष्ट्रीय राजधानी से सीधी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी मिल सके। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा बड़े उत्साह के साथ उद्घाटित यह ट्रेन आधुनिक रेल संपर्क का प्रतीक और पंजाब के लिए एक अनमोल उपहार बन चुकी है।

रवनीत बिट्टू ने आगे कहा कि, यह परिवर्तन केवल यात्री सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचे में भी स्पष्ट दिखाई देता है। पंजाब ने 100% रेलवे विद्युतीकरण हासिल कर लिया है। सैकड़ों किलोमीटर नई रेल पटरियां बिछाई गई हैं, जबकि 400 से अधिक ROBs, RUBs और अंडरपास निर्माणाधीन या स्वीकृत हैं, ताकि जाम कम हो और सुरक्षा बेहतर हो सके। मैंने व्यक्तिगत रूप से कई लंबित परियोजनाओं में हस्तक्षेप किया, जिनमें दोराहा और धूरी रेलवे ओवरब्रिज शामिल हैं, जहां प्रक्रियात्मक बाधाओं के कारण वर्षों से जनता को असुविधा हो रही थी। इसी प्रकार पठानकोट में अनेक लेवल क्रॉसिंग के कारण होने वाले गंभीर ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए हमने रेक मूवमेंट और परिचालन व्यवस्था का पुनर्गठन किया।

बिट्टू ने आगे कहा कि, ''मैं हमेशा मानता रहा हूं कि विकास राजनीति से ऊपर होना चाहिए। किसी भी राजनीतिक दल के नेताओं द्वारा ROBs, RUBs या यात्री सुविधाओं से संबंधित जो भी प्रस्ताव आए, उन्हें गंभीरता से लिया गया और समान प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाया गया, क्योंकि सर्वोच्च प्राथमिकता हमेशा जनकल्याण ही होना चाहिए। पंजाब का रेलवे परिवर्तन केवल पटरियों और स्टेशनों तक सीमित नहीं है। यह अवसरों का निर्माण है। बेहतर रेल अवसंरचना उद्योगों की लॉजिस्टिक लागत कम करेगी, सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत करेगी, पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को बढ़ावा देगी, कृषि व्यापार को समर्थन देगी और रोजगार सृजन करेगी। बठिंडा, लुधियाना, पटियाला, बटाला, जलंधर और सीमावर्ती जिलों जैसे औद्योगिक केंद्रों को बेहतर माल एवं यात्री परिवहन से अत्यधिक लाभ मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी राष्ट्रीय आर्थिक विकास में पंजाब की भूमिका को और मजबूत करेगी।

लंबित फाइलों से तेज गति वाले क्रियान्वयन तक की यह यात्रा दर्शाती है कि दृढ़ नेतृत्व, समन्वित शासन और निरंतर प्रयास क्या उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। रवनीत बिट्टू ने कहा कि, वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व, केंद्रीय रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव के निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग, तथा उन सभी रेलवे अधिकारियों और इंजीनियरों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने इन वर्षों पुराने सपनों को साकार करने के लिए अथक परिश्रम किया। पंजाब का रेलवे पुनर्जागरण शुरू हो चुका है। आज बिछाई जा रही रेल पटरियाँ केवल जमीन पर खिंची लाइनें नहीं हैं, वे आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, क्षेत्रीय संपर्क और पंजाब के हर नागरिक के मजबूत भविष्य की राह हैं।

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News Editor

Kamini

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