कोरोना के बाद खुले स्कूल लेकिन अब इस बात से परेशान हैं माता-पिता

punjabkesari.in Wednesday, Nov 24, 2021 - 10:38 AM (IST)

लुधियाना (विक्की) : कोरोना संक्रमण में कमी आने के बाद अब सभी छात्रों के लिए स्कूल अब सामान्य रूप से खुल गए हैं। वह बच्चे अब बहुत कम ही हैं जो कोरोना की वजह से स्कूल नहीं जा रहे हैं। लेकिन एक दम से स्कूल खुलने और सर्दी के चलते बच्चों के माता-पिता के लिए यूनिर्फाम न मिलने के कारण कई मुश्किलें खड़ी हो रही है। जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि शहर में लगभग सभी दुकानों पर स्कूल यूनिफॉर्म की शॉर्टेज चल रही है। अधिकतर बच्चों को  दुकानों में सर्दियों की यूनिर्फाम नहीं मिल पा रही। स्वैटर और ब्लेजर की सबसे ज्यादा कमी आ रही है। ऐसे में बच्चों के माता-पिता को सर्दियां आने पर बच्चों के स्वस्थ्य की चिंता सता रही है। 

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दुकानदारों के अनुसार यूनिफार्म की डिमांड 2019 की सर्दियों से लगभग दोगुनी है, जबकि प्रोडक्शन आधी भी नहीं हो पा रही है। इसी कारण यूनिफार्म के रेट 30% से भी अधिक बढ़ गए हैं। बता दे कि कोरोना के चलते पिछले साल और इस साल भी 6 महीने तक स्कूल बंद रहे। दुकानदार इस सोच में रहे कि शायद इस बार भी स्कूल नहीं खुलेंगे और तैयार माल अंदर ही लगा रह जाएगा। जिसके चलते उन्होंने यूनिर्फाम तैयार नहीं करवाई। जिन बच्चों के पास यूनिर्फाम थी वो छोटी हो गई और दुकानों पर हर एक साइज की ड्रेस उपलब्ध नहीं है। अब सर्दी बढ़ने से बच्चों की यूनिर्फाम की डिमांड में तेजी आई है और प्रोडक्शन की रफ्तार कम हो रही है।

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उन्होनें बताया कि उन्की बेटी शहर के एक नामी स्कूल में पढ़ती है। खाने पीने की चीज़ों के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल के दामों में लगी आग के बाद उन्हें घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया है। अब स्कूल यूनिफार्म के दाम पहले से कहीं अधिक बढ़ गए हैं जिसके कारण बहुत मुश्किल हो गई है। मगर समस्या यहीं खत्म नहीं हो रही, क्योंकि दुकानदारों के पास पूरी यूनिफार्म उपलब्ध ही नहीं। उन्होनें बताया कि उन्होनें शहर भर की दुकानें घूम ली हैं लेकिन उन्हें बेटी के लिए ब्लेजर और स्वैटर नहीं मिले। उन्होनें बताया कि उन्का बेटा 9वीं कक्षा में पढता है। इस बार यूनिफार्म खरीदे बिना काम नहीं चल सकता, क्योंकि पिछली यूनिफार्म बच्चों को छोटी हो गई है। पूरी यूनिर्फाम ना मिलने के कारण हर वर्ग का व्यक्ति प्रभावित हुआ है। महंगाई कम होने की बजाय दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। ऐसे में उन्हें घर और बच्चों की पढ़ाई दोनों के खर्च की चिंता सता रही है। 

लेबर के कारण काम हो रहा है। प्रभावित 
कोरोना दौर में अधिकतर लेबर पलायन कर गई। कई मजदूर अपने गांवों को चले गए और अभी तक वापिस नहीं आए। जिसका प्रभाव सीधे-सीधे प्रोडक्शन पर पड़ा है और डिमांड के अनुसार प्रोडक्शन नहीं हो पा रही है। किसी को कोई अनुमान नहीं था कि स्कूल कब खुलेंगे। इसलिए यूनिफार्म बनाने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया।   

न्यू क्लॉथ हाउस के मालिक विशाल ने बताया कि यूनिफार्म मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री पर सबसे अधिक कोरोना की मार पड़ी है। हम दुशहरे तक बड़ी दुविधा में थे कि स्कूल खुलेंगे। उसके बाद एक दम से स्कूल खुलने पर हम तैयार नहीं थे। हमारे पास अब भी लेबर की बहुत कमी है। काम ना होने के कारण हमने पहले 2020 और फिर 2021 में सर्दी सीजन के लिए काम करने के लिए आई लेबर को वापिस भेज दिया। जो लेबर अन्य कपड़ों का काम करती है वह स्कूल ड्रेस का काम नहीं कर सकती इसलिए किसी को भी इस काम पर नहीं लगाया जा सकता। लगभग 2 साल तक स्कूल बंद रहने से मशीने भी खराब हो चुकी है। ऐसी ही हालत रॉ मटेरियल सप्लायर की है। जहां समय पर रॉ मटेरिअल की सप्लाई नहीं हो रही है वहीँ इसके दाम 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं और कुछ चीजें तो ऐसी हैं जिसके दाम 40 प्रतिशत तक बढे हैं। पहले ही हमारे स्कूल यूनिफार्म के 3 सीजन खराब हो चुके हैं और अब चौथा भी ऐसे ही होगा। यह हमें साफ दिखाई दे रहा है। अगर सब कुछ सामान्य रहा तो भी हमें कम से कम 6 महीने और लगेंगे सब कुछ पहले जैसा करने में और डिमांड के अनुसार सप्लाई पूरी करने में।

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News Editor

Kamini

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