लुधियाना में किशोरियों के सशक्तिकरण का महा-अभियान शुरू, 12 से 18 साल की बेटियों ...

punjabkesari.in Friday, Sep 18, 2026 - 05:32 PM (IST)

लुधियाना (राज) : महानगर की किशोरियों 12 से 18 वर्ष को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर, जागरूक और सशक्त बनाने के उद्देश्य से पंजाब पुलिस के कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन द्वारा एक व्यापक जागरूकता एवं सशक्तिकरण अभियान की शुरूआत की गई है। इस महत्वाकांक्षी अभियान की रूपरेखा तय करने के लिए आज पुलिस लाइंस में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन की स्पेशल डीजीपी गुरप्रीत कौर दियो ने की। बैठक का मुख्य ध्येय समाज के कमजोर, वंचित और अपराध के लिहाज से संवेदनशील इलाकों में रहने वाली बच्चियों तक पहुंचकर उन्हें सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानूनी अधिकारों की ढाल प्रदान करना है।

एक मंच पर जुटे पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा विभाग और एनजीओ प्रतिनिधि

पुलिस लाइंस में आयोजित इस बैठक में कई प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और सामाजिक संस्थाओं ने भाग लिया। बैठक में एडीसीपी (इन्वेस्टिगेशन-कम-डिस्ट्रिक्ट कम्युनिटी पुलिसिंग अफसर) रूपिंदर भट्टी, स्वास्थ्य विभाग की ओर से सिविल सर्जन डॉ. रमनदीप कौर, डीएमसी अस्पताल से डॉ. अनुराग, जिला बाल संरक्षण अधिकारी रश्मि, चंडीगढ़ से आईडीआरएफ के शोधकर्ता, शिक्षा विभाग से अमनदीप सिंह और डू गुड फाउंडेशन लुधियाना से जैस्मिन पाहवा विशेष रूप से उपस्थित रहे। स्पेशल डीजीपी गुरप्रीत कौर दियो ने सभी विभागों को एक मंच पर लाकर एक साझा कार्ययोजना तैयार करने पर बल दिया, ताकि किशोरियों को उनके अधिकारों के प्रति सशक्त किया जा सके।

सेहत, सुरक्षा, साइबर अवेयरनेस और करियर गाइडेंस पर विशेष जोर 

इस महा-अभियान के तहत 12 से 18 आयु वर्ग की बेटियों को केवल बुनियादी शिक्षा तक सीमित न रखकर उनके सर्वांगीण विकास के लिए बहुआयामी प्रशिक्षण दिया जाएगा। 

स्वास्थ्य एवं स्वच्छता: शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य, उचित पोषण और माहवारी स्वच्छता के प्रति झिझक तोड़ना। 
सुरक्षा व कानूनी अधिकार: पोक्सो एक्ट, घरेलू हिंसा और आत्मरक्षा के उपायों की कानूनी जानकारी। 

मोबाइल-इंटरनेट के दौर में साइबर फ्रॉड से बचाव, डिजिटल सुरक्षा और वित्तीय समझ का विकास। करियर काउंसलिंग, लीडरशिप स्किल्स, संवाद कला और सरकार द्वारा चलाई जा रही जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाना। वंचित तबकों, स्कूल ड्रॉप-आउट्स और दिव्यांग बच्चियों तक पहुंचेगी टीम इस अभियान का दायरा केवल स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्राथमिक फोकस उन बच्चियों पर होगा जो सबसे अधिक जोखिम में हैं। इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर और प्रवासी मजदूरों के परिवारों, स्कूल छोड़ चुकीं (ड्रॉप-आउट्स) किशोरियों, दिव्यांग बच्चियों और बाल श्रम या बाल विवाह के खतरे का सामना कर रही बालिकाओं तक विशेष रूप से पहुंचा जाएगा, ताकि उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

नुक्कड़ नाटक, हेल्थ कैंप और सोशल मीडिया से जगाएंगे अलख  

अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए कई गतिविधियां तय की गई हैं। संवेदनशील बस्तियों और स्कूलों में मुफ्त मेडिकल और हेल्थ चेकअप कैंप लगाए जाएंगे, वोकेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी और नुक्कड़ नाटकों के जरिए संवेदनशील मुद्दों पर जागरूक किया जाएगा। इसके अलावा, अभियान का संदेश हर घर तक पहुंचाने के लिए हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी भाषा में इनफॉर्मेटिव वीडियो, लीफलेट्स और सोशल मीडिया कैंपेन चलाए जाएंगे। स्पेशल डीजीपी ने स्कूलों, शिक्षकों, माता-पिता और स्वयंसेवी संस्थाओं से इस मुहिम में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की, ताकि किशोरियों को इतना आत्मविश्वासी और सजग बनाया जा सके कि वे सुरक्षित निर्णय ले सकें और समाज के निर्माण में अपना सकारात्मक योगदान दे सकें।

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News Editor

Urmila

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