नवांशहर में सख्त पाबंदी आदेश जारी! रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक...
punjabkesari.in Friday, Mar 27, 2026 - 06:29 PM (IST)
नवांशहर (त्रिपाठी) : जिला मैजिस्ट्रेट गुलप्रीत सिंह औलख ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत विभिन्न संस्थानों और प्रतिष्ठानों के लिए निषेधात्मक आदेश जारी किए हैं।
उन्होंने ये कहा जिले के विभिन्न राजनीतिक दलों, संगठनों के नेताओं और पदाधिकारियों द्वारा किए जाने वाले जलसों, रैलियां, रोष धरने आदि, किसी भी एन.जी.ओ.ज., प्राइवेट, सामाजिक, मस्जिदों और गुरुद्वारों की प्रबंधकीय संस्थाएं गैर सरकारी संगठन के प्रबंधकों/पदाधिकारियों, वाणिज्यिक संगठनों/संस्थाओं आदि द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों के अवसर पर किसी भी भवन, सार्वजनिक स्थानों, खुले स्थानों, पंडालों में लाउडस्पीकर आदि के उपयोग एवं किसी विवाह-शादियां, खुशी के मौकों व अन्य मौकों आदि पर मैरिज पैलेसों, क्लबों, होटलों एवं खुले स्थानों पर डीजे, आर्केस्ट्रा, वाद्य यंत्र पंजाब उपकरण (शोर नियंत्रण) अधिनियम, 1956 में उल्लिखित शर्तों के तहत संबंधित उप-विभागीय मैजिस्ट्रेट की लिखित अनुमति के बिना नहीं चलाए जाएंगे। लिखित स्वीकृति प्राप्त करने के बाद शपथ पत्र देना होगा कि ध्वनि स्तर 10 डी.बी. (ए) से अधिक नहीं होगा।
इसके अलावा, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, संबंधित उपमंडल मैजिस्ट्रेट यह सुनिश्चित करेंगे कि परीक्षा के दिनों में परीक्षा से 15 दिन पहले तक किसी भी लाउडस्पीकर आदि की अनुमति न दी जाए। इसी प्रकार, जिले की सीमा के अंतर्गत लाऊंडस्पीकर एवं अन्य किसी भी संगीत वाद्ययंत्र आदि के संचालन की अनुमति प्राप्त होने के बावजूद सांस्कृतिक एवं धार्मिक अवसरों को छोड़कर रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक किसी भी भवन एवं स्थान पर उपरोक्त किसी भी ध्वनि एवं वाद्य यंत्र आदि के संचालन/बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा, जो पूरे वर्ष में 15 दिन से अधिक नहीं होगा तथा ध्वनि का स्तर 10 डी.बी. (ए) से अधिक नहीं होगा। इसके अलावा, निजी स्वामित्व वाली ध्वनि प्रणालियों और ध्वनि उत्पन्न करने वाले उपकरणों का ध्वनि स्तर 5 डी.बी. (ए) से अधिक नहीं होना चाहिए।
आदेशों के अनुसार यदि जिले में किसी द्वारा ध्वनि प्रदूषण के संबंध में कोई शिकायत दर्ज की जाती है, तो संबंधित उपमंडल मैजिस्ट्रेट, संबंधित पुलिस उपाधीक्षक और पर्यावरण अभियंता, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, होशियारपुर के समन्वय से मौके पर जाएंगे और प्राप्त शिकायत के संबंध में आवश्यक जांच करेंगे और यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो वह अदालत और उक्त अधिनियम द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार शिकायत में उल्लिखित किसी भी प्रकार के ध्वनि/संगीत उपकरण, जो ध्वनि प्रदूषण का कारण बन रहा है, को हटा देगा और अपने कब्जे में ले लेगा।
इस आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरूद्ध उक्त अधिनियम पर अपने स्तर से विधिक कार्यवाही करते हुए प्राप्त शिकायत का निस्तारण करेंगे। जारी आदेशों के अनुसार संबंधित अनुविभागीय मैजिस्ट्रेट से अनुमति लेकर जिन स्थानों पर किसी भी व्यक्ति द्वारा लाऊंड स्पीकर, ऑडियो/संगीत वाद्ययंत्र आदि बजाए जाएंगे, उनकी ध्वनि कार्यक्रम/समारोह स्थल, धार्मिक स्थल एवं भवन आदि की सीमा के भीतर होनी चाहिए, जो भारत सरकार द्वारा 'ध्नि ‘प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम 2000’ के तहत जारी अधिसूचना दिनांक 14.02.2000 में निर्दिष्ट ध्वनि मानक से अधिक नहीं होनी चाहिए।'.
जिला मैजिस्ट्रेट के मुताबिक यह प्रतिबंध और रोक लगाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि मैरिज पैलेसों, होटलों में बहुत तेज आवाज में लाऊड स्पीकर, डी.जे. आदि का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, कई पेशेवर गायक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं और देर रात तक लाऊंड स्पीकर/डी.जे. आदि का उपयोग करते हैं, जिससे आस-पास रहने वाले लोगों, मरीजों और स्कूल जाने वाले बच्चों को असुविधा होती है और शोर प्रदूषण के कारण उनके स्वास्थ्य को भी खतरा होता है। यह आदेश 20 मई 2026 तक लागू रहेगा।
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