शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों को बड़ी राहत, विभाग ने जारी किए नए निर्देश

punjabkesari.in Friday, Jan 02, 2026 - 11:09 AM (IST)

लुधियाना (विक्की): पंजाब के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और शिक्षकों की कमी से जूझ रहे संस्थानों को राहत देने के लिए डायरैक्टोरेट स्कूल एजुकेशन (एलीमैंट्री) ने एक दूरगामी निर्णय लिया है। अक्सर देखा जाता है कि कई स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ने या कम होने के कारण शिक्षकों की तैनाती का संतुलन बिगड़ जाता है जिसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है।

इस समस्या के स्थायी समाधान के रूप में अब विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों (एलीमैंट्री) को अपने-अपने जिलों के भीतर शिक्षकों की 'आरजी' (अस्थायी) व्यवस्था करने के व्यापक अधिकार दे दिए हैं। यू-डाइस और ई-पंजाब पोर्टल से मिले डेटा की गहन जांच में यह पाया गया था कि राज्य के कुछ स्कूलों में छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की संख्या बहुत अधिक है, जबकि कई ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों के स्कूल स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं।

शैक्षणिक सत्र के दौरान हर 3 माह में होगी कार्यों की समीक्षा

विभाग द्वारा जारी नए नियमों के अनुसार ये अस्थायी प्रबंध पूरे शैक्षणिक सत्र के लिए किए जाएंगे। हालांकि, शिक्षकों की स्थिति जैसे कि किसी का तबादला, सेवानिवृत्ति या पदोन्नति बदलती रहती है, इसलिए जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर 3 महीने में इन तैनातियों की समीक्षा करें। इस समीक्षा का एक आधिकारिक प्रमाण पत्र हर तिमाही में मुख्य कार्यालय को भेजना अनिवार्य होगा ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे। इन नियुक्तियों में विशेष रूप से उन दूर-दराज के और पिछड़े इलाकों के स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां 'प्यूपिल टीचर रेश्यो' (पी.टी.आर.) के अनुसार शिक्षकों की भारी कमी है।

छात्रों की संख्या के आधार पर तय होगा शिक्षकों का कोटा

शिक्षकों की जरूरत को समझने के लिए विभाग ने एक विस्तृत तालिका जारी की है। इसके तहत 1 से 20 छात्रों वाले स्कूल में 1 शिक्षक, 21 से 60 छात्रों पर 2 शिक्षक, 61 से 90 छात्रों पर 4 शिक्षक, और 91 से 120 छात्रों वाले स्कूलों में 5 शिक्षकों की तैनाती का प्रावधान किया गया है।

इसी क्रम में 350 छात्रों तक शिक्षकों की संख्या निर्धारित की गई है। यदि किसी स्कूल में छात्रों की संख्या 351 से अधिक है, तो वहां हर 40 अतिरिक्त विद्यार्थियों पर एक और शिक्षक नियुक्त किया जा सकता है। उदाहरण के रूप में, यदि किसी स्कूल में केवल 20 बच्चे पढ़ रहे हैं लेकिन वहां 3 शिक्षक तैनात हैं, तो वहां से 2 शिक्षकों को हटाकर उन स्कूलों में भेजा जाएगा जहां शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

ट्रांसफर पॉलिसी और वरिष्ठता का रखा जाएगा विशेष ध्यान

अस्थायी ड्यूटी पर भेजते समय शिक्षकों के हितों का भी ध्यान रखा गया है। नियमों के मुताबिक जिस स्कूल से शिक्षक को भेजा जाना है, वहां से सबसे पहले 'इच्छुक' शिक्षकों को अवसर दिया जाएगा। यदि कोई स्वेच्छा से नहीं जाता तो स्कूल में सबसे अधिक समय से तैनात सीनियर शिक्षक को भेजा जा सकता है। टीचर ट्रांसफर पॉलिसी 2019 के अंतर्गत आने वाली 'एग्जेंप्टेड कैटेगरी' के शिक्षकों और उन अध्यापकों को जिनकी सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय बचा है, उनकी सहमति के बिना कहीं भी तैनात नहीं किया जाएगा। विभाग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि अस्थायी स्कूल की दूरी शिक्षक के मूल स्कूल से कम से कम हो।

सैंटर, ब्लॉक और जिला स्तर पर चरणबद्ध तरीके से होगी तैनाती

तैनाती की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। सबसे पहले संबंधित सैंटर स्कूल के अधीन आने वाले अतिरिक्त शिक्षकों को कमी वाले स्कूलों में भेजा जाएगा। यदि वहां से समाधान नहीं होता, तो ब्लॉक स्तर पर और फिर पड़ोसी ब्लॉक के स्कूलों से शिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी। यदि इन सभी स्तरों पर शिक्षक उपलब्ध नहीं होते, तभी जिला स्तर पर सरप्लस शिक्षकों की सूची देखी जाएगी। विशेष और आपातकालीन परिस्थितियों में जिला शिक्षा अधिकारियों को यह अधिकार भी दिया गया है कि वे बिना किसी पूर्व शर्त के 15 दिनों के लिए किसी भी शिक्षक की अस्थायी ड्यूटी लगा सकते हैं।

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News Editor

Urmila

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