भुगतान न होने के कारण किसानों का गन्ने की खेती से भी मोह होने लगा भंग
punjabkesari.in Tuesday, Nov 26, 2019 - 03:55 PM (IST)
भोगपुर(सूरी): पंजाब में पानी का स्तर दिन-प्रतिदिन नीचे जा रहा है और सरकार धान के क्षेत्रफल को कम कर किसानों को दूसरी फसलों की बिजाई करने के लिए जागरूक कर रही है। अब बहुत सारे किसान धान की फसल को छोड़ कर गन्ने की खेती करने लग पड़े थे, परन्तु चीनी मिलों द्वारा समय पर गन्ने की फसल की धनराशि की अदायगी न किए जाने के कारण गन्ना उत्पादक किसानों का मोह गन्ने की खेती से भंग होने लगा है। किसानों की हालत इतनी दयनीय है कि उनको अपने पैसे लेने के लिए धरना प्रदर्शन करना पड़ रहा है। वहीं सरकार भी गन्ना काश्तकारों की तरफ ध्यान नहीं दे रही हैं।

गन्ना बेचने वाले किसानों पर लगाई जाती है पैनल्टी
सहकारी चीनी मिल भोगपुर हर साल गन्ना उत्पादक किसानों के गन्ने की मात्रा को (क्विंटलों में) सीजन शुरू होने से पहले बॉन्ड करती है और बॉन्ड किए गए गन्ने की मात्रा का 85 प्रतिशत हिस्सा गन्ना मिल को देने वाले किसानों पर भी पैनल्टी लगाई जाती है। जब मिल में गन्ने का पेराई सीजन चालू होता है तो किसान गन्ना लेकर मिल में जाता है। इस दौरान सबसे पहले उसके बॉन्ड किए गए गन्ने की बनती पैनल्टी काट ली जाती है, परन्तु इसके बाद भी उसे काटी गई पैनल्टी की रकम नहीं दी जाती।
किसान बैंक से लिए कर्जे के ब्याज को चुकाने में असमर्थ
दोआबा के किसान बड़े स्तर पर गन्ने का उत्पादन करते हैं। मिलों द्वारा गन्ने का भुगतान न किए जाने के कारण किसान बैंक से लिए कर्जे का ब्याज देने में असमर्थ नजर आ रहा है। भोगपुर चीनी मिल ने पिछले साल से किसानों का 25 करोड़ रुपए का बकाया अब तक नहीं दिया। किसान कई बार मिल प्रशासन और संबंधित मंत्री से बकाया देने की मांग कर चुके हैं परन्तु किसानों के हाथ अब तक निराशा ही लगी है।

सरप्लस गन्ना दूर की मिलों को अलॉट करने के कारण किसान परेशान
भोगपुर ब्लाक में 60 लाख क्विंटल के करीब गन्ने का उत्पादन होता है जिसमें भोगपुर मिल अपने सामर्थ्य से अधिक 20 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई करती है। सहकारिता विभाग की तरफ से 20 लाख क्विंटल बाकी बचे गन्ने को पंजाब की दूसरे चीनी मिलों को अलॉट कर दिया जाता है, परन्तु ज्यादातर चीनी मिलें बहुत दूर होने के कारण किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

