मास्क पहनकर ही निकलें घर से, सांस लेने लायक नहीं उत्तर भारत में हवा

10/21/2019 9:41:07 AM

लुधियाना (गौतम, सलूजा): पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि समस्त उत्तर भारत में कहीं भी हवा सांस लेने लायक नहीं है। प्रदेश सरकारें इन दिनों अपने राज्यों में किसानों को पराली जलाने से रोक पाने में तो नाकाम हुई हैं ऊपर से पाकिस्तान की ओर से आ रही प्रदूषित हवा ने सांस लेना और दूभर कर दिया है। चैस्ट स्पैशलिस्ट डॉक्टरों की मानें तो 3 सालों में 30 प्रतिशत तक दमे के मरीज बढ़ गए हैं।
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पंजाब की बात करें तो प्रदेश सरकार, कृषि विभाग और पी.ए.यू. समेत अलग-अलग संस्थाओं का पराली को जलाने से रोकने के लिए इस समय पूरा जोर लगा हुआ है। सरकार की तरफ  से लोगों को जागरूक करने व अन्य प्रयत्नों के बावजूद पराली को जलाने के मामलों में बढ़ौतरी हो रही है। पिछले वर्ष पंजाब में पराली जलाने के मामलों की संख्या 23 सितम्बर से लेकर 17 अक्तूबर तक 1198 थी जो इस वर्ष 2019 में इस अवधि में 1631 का आंकड़ा छू गई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 433 अधिक मामले पराली जलाने के सामने आए हैं। इससे पहले 2017 में पंजाब में पराली जलाए जाने के 3176 मामले सामने आए थे। पिछले 3 सालों से अमृतसर में सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं जिसमें साल 2017 में सबसे अधिक 479, साल 2018 में 401 और साल 2019 में अब तक 452 मामले सामने आए हैं, जबकि तरनतारन भी किसी लिहाज से पीछे नहीं है।

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वाटर फिल्टर के साथ एयर फिल्टर भी बने जरूरत
ई.एस.आई. हॉस्पिटल जालंधर के एस.एम.ओ. व चैस्ट स्पैशलिस्ट डॉ. नरेश बठला के अनुसार वायु मंडल में प्रदूषण की एक परत बन गई है जिसका असर मानव जीवन पर पड़ रहा है। हवा, पानी और खाना तीनों ही शुद्ध नहीं हो तो स्वस्थ जीवन के बारे में सोचना भी गलत है। हवा में प्रदूषण बढ़ जाने की वजह से न तो फेफड़ों को शुद्ध ऑक्सीजन मिल रही है और न ही हृदय को। हृदय की गति को सही रखने के लिए शुद्ध ऑक्सीजन का होना जरूरी है। फेफड़ों का काम ऑक्सीजन को फिल्टर करना है लेकिन प्रदूषण ही इतना बढ़ गया है कि फेफड़े सही तरह से काम नहीं कर पाते। सिगरेट न पीने वाले व्यक्ति के फेफड़ों में भी हर रोज कम से कम 10 सिगरेट के बराबर धुआं जा रहा है, ऐसे में सांस और हृदय रोगियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। जिस तरह से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है उस हिसाब से हर किसी को अपने घर में वाटर फिल्टर के साथ-साथ एयर फिल्टर भी लगाना पड़ सकता है। इसलिए हर किसी को अपने घर में कम से कम 3 से 4 गमलों में पौधे जरूर लगाने चाहिएं ताकि कुछ हद तक प्रदूषित हवा से बचा जा सके। 

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नमी की वजह से अभी और बढ़ेगा प्रदूषण
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इन दिनों में फैस्टिव सीजन होने की वजह से फैक्टरियां दिन-रात चलती हैं। ट्रैफिक में इजाफा होता है और अन्य कारणों से भी प्रदूषण में बढ़ौतरी होती है। वहीं पराली का कोई हल नहीं निकलते देख किसानों द्वारा पराली जलाए जाने से प्रदूषण खतरनाक हो रहा है तथा मौसम में बदलाव के चलते वायु में नमी आने से आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढऩे की आशंका है। पंजाब रिमोट सैंसिंग सैंटर के वैज्ञानिक डा. अनिल सूद ने जानकारी देते हुए बताया कि किस वर्ष किस शहर में कितने मामले पराली जलाने के सामने आए हैं। 

 

इस साल 17 अक्तूबर तक एयर क्वालिटी इंडैक्स

लुधियाना

 156
जालंधर 126
बठिंडा 133
जालंधर 126
पटियाला 114
मंडी गोबिंदगढ़   100
रूपनगर  130

  

इन बातों का रखें ध्यान
- पूरी बाजू की शर्ट पहनें, शरीर को अधिक से अधिक ढक कर रखें। 
- फ्राई व जंक फूड खाने से परहेज करें, पानी अधिक से अधिक मात्रा में लें। 
- सुबह-शाम सैर करते समय अपना ध्यान रखें, किसी भी तरह की दिक्कत होने पर तुरंत डाक्टर से संपर्क करें, अधिक सांस चढऩे पर रुक-रुक कर काम करें। 
- प्रदूषण फैलाने वाले चीजों से परहेज करें। 
- बीमारी ग्रस्त लोग अधिक ट्रैफिक में जाने से परहेज करें क्योंकि वाहनों के धुएं और ध्वनि प्रदूषण का गहरा असर होता है। 
- घरों में सफाई का पूरा ध्यान रखें और वस्तुओं पर मिट्टी न जमने दें। 
- खुले स्थानों पर बैठने से परहेज करें क्योंकि इन दिनों में सुबह व शाम को अधिक प्रदूषण होने से समस्या पैदा होती है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2018 की रिपोर्ट 
-12 लाख लोगों की हर साल भारत में प्रदूषण से मौत
-70 लाख लोगों की हर साल विश्व में प्रदूषण से मौत

वैश्विक आंकड़ा 
- 34 प्रतिशत हृदय रोग से जुड़ी मौतों की वजह प्रदूषण
- 10 में से 9 व्यक्ति गंभीर प्रदूषण की चपेट में हैं।

    
    
    
    
 
  


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