पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के 2 एक्सइएन पर गंभीर आरोप, सैंपलिंग के नाम पर ‘सेटिंग’ का खेल! कारोबारियों में बढ़ा रोष

punjabkesari.in Wednesday, Sep 23, 2026 - 10:52 AM (IST)

लुधियाना (राम): पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड यानी PPCB के लुधियाना में तैनात 2 एक्सईएन को लेकर औद्योगिक हलकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। कारोबारी सूत्रों की मानें तो दोनों अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर कई उद्योगपति परेशान हैं और अंदरखाते विभाग के उच्च अधिकारियों तक दोनों के तबादले की मांग भी पहुंचाई जा चुकी है। आरोप है कि औद्योगिक इकाइयों में सैंपलिंग और निरीक्षण के नाम पर विजिट की जाती है और इसी दौरान कथित तौर पर ‘सेटिंग’ का खेल चलता है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। कारोबारी सूत्रों का दावा है कि दोनों अधिकारियों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में काम करने वाली कई औद्योगिक इकाइयां पिछले कुछ समय से दबाव महसूस कर रही हैं। कारोबारियों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन करना उद्योगों की जिम्मेदारी है और किसी भी नियम उल्लंघन पर विभाग कार्रवाई कर सकता है, लेकिन कार्रवाई की प्रक्रिया पारदर्शी और समान होनी चाहिए। आरोप यह है कि कुछ मामलों में निरीक्षण और सैंपलिंग को लेकर ऐसी स्थिति पैदा की जाती है, जिससे कारोबारी अधिकारियों के साथ समझौता करने को मजबूर महसूस करते हैं।

‘सैंपलिंग’ के नाम पर यूनिटों में विजिट, फिर शुरू होती है कथित सेटिंग

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पीपीसीबी की ओर से यूनिटों में नियमित निरीक्षण और सैंपलिंग की जाती है। यह पर्यावरणीय नियमों की निगरानी के लिए सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन कुछ कारोबारियों का आरोप है कि इसी प्रक्रिया का कथित तौर पर दुरुपयोग किया जा रहा है। कारोबारियों का कहना है कि टीम यूनिट में पहुंचने के बाद प्रदूषण संबंधी कमियों की ओर इशारा करती है। इसके बाद कार्रवाई, नोटिस या सैंपल रिपोर्ट को लेकर कारोबारी पर दबाव बनने की स्थिति पैदा होती है। 

आरोप है कि कुछ मामलों में इसके बाद विभागीय स्तर पर ‘सेटिंग’ कराने के रास्ते सुझाए जाते हैं। उद्योगपतियों का सवाल है कि अगर किसी यूनिट में नियमों का उल्लंघन मिलता है तो विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। पूरी प्रक्रिया लिखित और रिकॉर्ड पर होनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा कार्रवाई से बचाने के बदले किसी तरह की सुविधा या समझौते का रास्ता सुझाया जाता है तो यह गंभीर मामला है और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

कारोबारी ने जानकार से एक्सईएन से बात करवाई, मिला एसडीओ से ‘सेटिंग’ का कथित सुझाव

इसी बीच एक कारोबारी से जुड़ा मामला भी उद्योग जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। कारोबारी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पीपीसीबी के कुछ कर्मचारी एक औद्योगिक यूनिट में पहुंचे थे। मामले को लेकर कारोबारी ने अपने एक जानकार के माध्यम से संबंधित एक्सईएन से बातचीत करवाने की कोशिश की। आरोप है कि बातचीत के दौरान एक्सईएन की ओर से कारोबारी को कथित तौर पर यह कहा गया कि वह संबंधित एसडीओ से ‘सेटिंग’ कर ले, तो उसके लिए बेहतर रहेगा। यदि यह बातचीत वास्तव में हुई है तो इसकी जांच की जरूरत है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में बातचीत की रिकॉर्डिंग, कॉल विवरण, विभागीय रिकॉर्ड और संबंधित यूनिट से जुड़े दस्तावेज जांच का अहम हिस्सा हो सकते हैं।

कारोबारी का आरोप, ‘एसडीओ से सेटिंग कर लो तो ठीक रहेगा’

पीपीसीबी के कर्मचारी एक औद्योगिक यूनिट में पहुंचे। कारोबारी ने मामले को लेकर अपने जानकार के माध्यम से संबंधित एक्सईएन से बात करवाने की कोशिश की। आरोप है कि बातचीत के दौरान कारोबारी को कथित तौर पर सलाह दी गई कि वह एसडीओ से ‘सेटिंग’ कर ले, तो उसके लिए ठीक रहेगा। कारोबारी वर्ग का कहना है कि यदि किसी अधिकारी की ओर से इस तरह की बात कही गई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

35 से 40 लाख रुपये महीने की कमाई के दावे, जांच की मांग

दोनों अधिकारियों को लेकर कारोबारी हलकों में सबसे गंभीर चर्चा कथित कमाई को लेकर है। सूत्रों की ओर से दावा किया जा रहा है कि दोनों अधिकारी कथित तौर पर 35 से 40 लाख रुपये प्रतिमाह तक कमा रहे हैं। हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र दस्तावेज या आधिकारिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। यही वजह है कि कारोबारियों का एक वर्ग अब मांग कर रहा है कि केवल आरोप-प्रत्यारोप तक मामला सीमित रखने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए। यदि आरोप गलत हैं तो जांच से स्थिति साफ हो जाएगी और यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।

अंदरखाते तबादले की मांग, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

कारोबारियों के मुताबिक दोनों एक्सईएन को लेकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायतें और मौखिक तौर पर आपत्तियां पहुंचाई गई हैं। सूत्रों का दावा है कि कुछ कारोबारी दोनों अधिकारियों के तबादले की मांग भी कर रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि किसी भी नियामक विभाग में अधिकारियों की निष्पक्षता और पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी अधिकारी के खिलाफ लगातार शिकायतें आ रही हैं तो विभाग को कम से कम प्राथमिक स्तर पर जांच करवानी चाहिए। आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई और आरोप निराधार पाए जाने पर अधिकारियों को क्लीन चिट दी जा सकती है।

उद्योग पहले ही मुश्किल दौर में, अब विभागीय दबाव का आरोप

लुधियाना को लंबे समय से पंजाब के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। उद्योगपति पहले ही उत्पादन लागत, बिजली, श्रम, बाजार की प्रतिस्पर्धा और अन्य कारोबारी चुनौतियों का सामना करने की बात कहते रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि ऐसे समय में यदि सरकारी विभागों की कार्रवाई को लेकर भी असुरक्षा महसूस होगी तो उद्योग के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा। कुछ उद्योग प्रतिनिधियों का आरोप है कि लगातार बढ़ते दबाव के कारण कारोबारी पंजाब में नए निवेश को लेकर भी सोचने लगे हैं और कुछ इकाइयां दूसरे राज्यों में जाने के विकल्प पर विचार कर रही हैं।

नियमों का पालन जरूरी, लेकिन कार्रवाई भी हो पारदर्शी

उद्योगपतियों का कहना है कि पर्यावरण नियमों का पालन किसी भी कीमत पर जरूरी है। प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर कार्रवाई होनी चाहिए और जो उद्योग नियमों का उल्लंघन करते हैं, उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कदम उठाए जाने चाहिए। लेकिन कारोबारियों की मुख्य मांग यह है कि निरीक्षण, सैंपलिंग, रिपोर्ट, नोटिस और कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो। हर विजिट का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाए। सैंपल लेने की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी हो और सैंपल की रिपोर्ट सीधे ऑनलाइन उपलब्ध करवाई जाए, ताकि किसी अधिकारी या कर्मचारी के स्तर पर मनमानी की गुंजाइश कम हो।

सी.बी.आई. जांच के साथ संपत्ति और बैंक खातों की जांच की मांग

मामला अब केवल तबादले तक सीमित नहीं है। कारोबारी वर्ग के कुछ लोगों ने दोनों एक्सईएन की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है। कुछ कारोबारियों की ओर से तो सीबीआई जांच की मांग भी की जा रही है। इसके साथ ही मांग की जा रही है कि अधिकारियों की आय के ज्ञात स्रोतों के मुकाबले उनकी चल-अचल संपत्ति, बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेनदेन की जांच की जाए। कारोबारियों का कहना है कि यदि लगाए जा रहे 35 से 40 लाख रुपये प्रतिमाह की कथित कमाई के दावों में कोई सच्चाई है तो वित्तीय जांच के दौरान इसका पता लगाया जा सकता है। हालांकि, केवल आरोपों के आधार पर किसी अधिकारी की संपत्ति या बैंक खातों में अनियमितता मान लेना उचित नहीं होगा। 

इसके लिए सक्षम जांच एजेंसी की दस्तावेजी जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड जरूरी होंगे। उद्योग जगत की मांग है कि दोनों एक्सईएन के कार्यकाल के दौरान उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाली औद्योगिक इकाइयों की सैंपलिंग, निरीक्षण, नोटिस, बंदी आदेश और अन्य कार्रवाई का रिकॉर्ड खंगाला जाए। यह भी देखा जाए कि किन यूनिटों में कितनी बार विजिट हुई, किस आधार पर कार्रवाई की गई और कार्रवाई के बाद क्या परिणाम रहा। इसके अलावा उन कारोबारियों के बयान भी लिए जा सकते हैं, जिन्होंने अधिकारियों या कर्मचारियों पर कथित दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। यदि किसी मामले में ‘सेटिंग’ के नाम पर लेन-देन का आरोप सामने आता है तो उसके वित्तीय और डिजिटल साक्ष्यों की जांच भी की जा सकती है।

विभाग की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

फिलहाल उद्योग जगत की नजर पीपीसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर है। कारोबारियों का कहना है कि आरोप गंभीर हैं और इनका जवाब केवल मौखिक आश्वासन से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच से मिलना चाहिए। उनका कहना है कि यदि दोनों अधिकारियों के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं तो जांच के बाद यह बात साफ हो जाएगी। वहीं, यदि किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

पीपीसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों ने फोन का नहीं दिया जवाब, एसडीओ ने कहा- श्रेणी के हिसाब से होती है इकाइयों में विजिट

वहीं, इस संबंध में जब पीपीसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो बार-बार फोन करने के बावजूद उन्होंने कोई जवाब देना उचित नहीं समझा। दूसरी ओर, जब संबंधित एस.ई.विजय से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयों में होने वाली विजिट उनकी श्रेणी के आधार पर निर्धारित होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किस इकाई में कब निरीक्षण किया जाना है, यह उसकी श्रेणी के अनुसार तय होता है। इसके अलावा यदि किसी इकाई के संबंध में कोई शिकायत प्राप्त होती है तो शिकायत के आधार पर भी विभाग की ओर से विजिट की जाती है।

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News Editor

Kamini

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