अमृतसर में कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत! सिविल अस्पताल में शुरू हुआ डे-केयर सेंटर

punjabkesari.in Tuesday, Jul 21, 2026 - 12:35 PM (IST)

अमृतसर (दलजीत): जलियांवाला बाग मैमोरियल सिविल अस्पताल में कैंसर मरीजों के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। अस्पताल में 6 बैड की क्षमता वाला आधुनिक ‘कैंसर डे केयर सैंटर’ शुरू कर दिया गया है और अब मरीजों का कीमोथैरेपी के जरिए इलाज भी आरंभ हो चुका है। इस नई सुविधा से गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।

अस्पताल प्रबंधकों के मुताबिक यह डे केयर सैंटर आई.सी.यू. के बिल्कुल सामने बनाया गया है ताकि एमरजैंसी स्थिति में तुरंत इलाज दिया जा सके। यहां उन मरीजों को कीमोथैरेपी दी जा रही है जिन्हें अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं होती। इलाज के बाद मरीजों को कुछ समय के लिए निगरानी में रखा जाता है। सिविल अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को पहले ही मैडीकल कालेज के कैंसर विभाग में विशेष ट्रेनिंग दिलाई गई है। विशेषज्ञों की देख-रेख में मरीजों को कीमोथैरेपी दी जा रही है। डाक्टरों के अनुसार मरीज की स्थिति के मुताबिक एक सप्ताह, 15 दिन या महीने के अंतराल पर थैरेपी दी जाती है।

डरावने आंकड़े : अमृतसर में 19,700 से अधिक कैंसर मरीज 

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अमृतसर में इस समय लगभग 19,700 कैंसर मरीज उपचाराधीन हैं। साल 2025 से तुलना करें तो 3600 नए मामले बढ़े हैं। पूरे पंजाब में यह संख्या करीब 42 हजार तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित पानी और बदलती जीवनशैली इस बीमारी के बढ़ने के मुख्य कारण हैं।

मरीजों को घर के पास ही मिल रहा उच्च स्तरीय इलाज : सिविल सर्जन 

सिविल सर्जन डॉ. रश्मि ने कहा कि कैंसर डे केयर सैंटर शुरू होने से जिले के मरीजों को बहुत बड़ी सुविधा मिली है। अब मरीजों को कीमोथैरेपी के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़ेगा। सिविल अस्पताल में ही सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण इलाज की शुरुआत कर दी गई है जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी।

सभी प्रबंध मुकम्मल, मरीजों को मिल रहा तुरंत लाभ : डा. रजनीश 

सीनियर मैडीकल अधिकारी डा. रजनीश ने बताया कि सैंटर के लिए सभी बुनियादी ढांचे और उपकरण पहले ही तैयार कर लिए गए थे। उन्होंने कहा कि 6 बैड वाले इस सैंटर में प्रशिक्षित स्टाफ की देख-रेख में मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत होंगी और हजारों मरीजों को अपने शहर में ही बेहतर इलाज मिलेगा।

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News Editor

Kalash

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