आशा को भारी पड़ा हाईकमान को गलत रिपोर्टिंग करना, गई पंजाब इंचार्ज की कुर्सी!

9/12/2020 11:14:33 AM

जालंधर(विशेष): कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस की इंचार्ज आशा कुुमारी की पद से छुट्टी कर दी है। उनकी जगह हरीश रावत पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष होंगे। आशा की छुट्टी होने से कई कांग्रेसियों में खुशी की लहर है क्योंकि आशा ने अपने कार्यकाल के दौरान पंजाब के कई कांग्रेसियों के सपने ध्वस्त किए थे और आशा से नाराज इन कांग्रेसियों ने पंजाब प्रभारी की शिकायतों की रिपोर्ट कांग्रेस आलाकमान को पहुंचाई थी और इन शिकायतों में आशा कुमारी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए थे। 

चुनाव के दौरान गलत रिपोर्टिंग भारी पड़ी
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान पंजाब में कांग्रेस की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही थी। लेकिन इस बीच प्रदेश प्रभारी आशा कुमारी ने हाईकमान तक सही रिपोर्टिंग नहीं की और कई सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा को लेकर देरी हो गई। इस देरी के कारण ही विपक्ष को पांव जमाने का मौका मिला और कांग्रेस पंजाब में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। कांग्रेस ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की। जबकि अकाली दल-भाजपा को 4 और आम आदमी पार्टी एक सीट जीत गई। इससे पहले आए चुनावों के सर्वे के दौरान कांग्रेस का पलड़ा ज्यादा भारी बताया जा रहा था। खासतौर पर फिरोजपुर में कांग्रेस के उम्मीदवार की घोषणा में देरी के चलते सुखबीर बादल यह सीट जीत गए और शेर सिंह घुबाया को हार का मुंह देखना पड़ा। इसी तरह विधानसभा चुनाव के दौरान भी कई उम्मीदवारों ने आशा कुमारी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। खासतौर पर पठानकोट में रमन भल्ला द्वारा सरेआम आशा कुमारी को भ्रष्ट कहे जाने की खबरों ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। इसी चुनाव के दौरान गढ़शंकर सीट को लेकर भी काफी विवाद हुआ था और बाद में कांग्रेस यह सीट हार गई। इस सीट पर निमिशा मेहता मजबूत उम्मीदवार थी लेकिन लव कुमार गोल्डी को आशा कुमारी के कारण टिकट मिली और लव कुमार गोल्डी न सिर्फ यह चुनाव हारे बल्कि कांग्रेस की आंधी के बीच तीसरे नम्बर पर सिमट गए। 

चेयरमैनियों में भी लेन-देन के आरोप लगे
आशा कुमारी के जरिए पंजाब में कई जिलों में इम्प्रूवमैंट ट्रस्टों और बोर्डों के चेयरमैन लगाए गए। इस दौरान इन चेयरमैनियों की नियुक्ति को लेकर भी आशा कुमारी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। इतना ही नहीं जिलों के प्रधान बनाने को लेकर भी पार्टी के भीतर ही एक धड़ा इंचार्ज की भूमिका से खुश नहीं था और यह आरोप लगाए गए कि कई जिलों में संगठन पर मजबूत पकड़ न रखने वाले नेताओं को कुर्सी दी गई। 

सी.एम. की फेवरेट, बाजवा सिद्धू से नहीं बनी
आशा कुमारी अपने पद पर रहते हुए मुख्यमंत्री कै. अमरेंद्र सिंह की फेवरेट रही और हाईकमान को राज्य की पूरी रिपोर्ट करने की बजाय मुख्यमंत्री की इच्छा के मुताबिक ही रिपोर्ट करती रही। इस बात की शिकायत भी हाईकमान को पहुंचाई गई। पंजाब के कांग्रेस के दो दिग्गज नेता नवजोत सिंह सिद्धू और प्रताप सिंह बाजवा भी आशा कुमारी से खासे नाराज थे। अब आशा की छुट्टी के बाद यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं इन दोनों नेताओं के प्रभाव में कहीं छुट्टी तो नहीं हुई।  


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