साइबर ठगी से रहें सावधान: मदद के नाम पर आने वाले हर लिंक पर भरोसा न करें, पढ़ें पूरी खबर

punjabkesari.in Monday, Sep 07, 2026 - 01:21 PM (IST)

लुधियाना(राज) : किसी भी प्राकृतिक आपदा, बाढ़ या संकट के समय जब लोग मानवता के नाते पीडि़तों की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाते हैं, तो शातिर साइबर अपराधी इसे ठगी का हथियार बना लेते हैं। हाल ही में नेपाल में हुई त्रासदी के चलते कई लोग मदद मांग रहे है। इसी के चलते ऐसे मामलों को लेकर पुलिस और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने आम जनता को सचेत किया है। मदद और सामाजिक सेवा के नाम पर सोशल मीडिया, व्हाट्सएप या एसएमएस के जरिए आने वाले हर अनजान लिंक पर आंख मूंदकर भरोसा न करने की सख्त हिदायत दी गई है। जरा सी असावधानी और बिना जांच-पड़ताल के किया गया एक क्लिक आपकी गाढ़ी कमाई को साइबर ठगों के हवाले कर सकता है।

फर्जी लिंक बनाकर इमोशनल अपील करते हैं साइबर अपराधी
साइबर सेल के अधिकारियों के मुताबिक, ठग अक्सर बाढ़ पीडि़तों, अनाथ बच्चों या गंभीर बीमारियों के इलाज के नाम पर फर्जी वेबसाइट और यूपीआई लिंक तैयार करते हैं। इन लिंक के साथ बेहद मार्मिक तस्वीरें और भावुक संदेश जोडक़र सोशल मीडिया ग्रुपों में तेजी से वायरल किए जाते हैं। जैसे ही कोई मददगार व्यक्ति दान देने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करता है, तो या तो उसका बैंक खाता खाली हो जाता है या फिर फोन में मैलवेयर इंस्टॉल कर संवेदनशील जानकारी चुरा ली जाती है।

साइबर ठगी से बचने के लिए इन जरूरी बातों का रखें ध्यान
किसी भी राहत कोष, गैर-सरकारी संगठन या सामाजिक संस्था को आर्थिक मदद देने से पहले उनकी आधिकारिक वेबसाइट या सरकार द्वारा जारी किए गए ऑथेंटिक बैंक खातों व क्यूआर कोड की दोबारा पुष्टि जरूर करें। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप फॉरवर्ड या अज्ञात नंबरों से आने वाले डोनेशन लिंक पर सीधे क्लिक करके कभी भी पेमेंट न करें। ध्यान रहे कि पैसे भेजते समय ही पिन डाला जाता है, पैसे प्राप्त करने के लिए कभी भी पिन की जरूरत नहीं होती। किसी भी अनजान रिक्वेस्ट को अप्रूव न करें। मुख्यमंत्री राहत कोष, पीएम केयर्स फंड या मान्यता प्राप्त रेड क्रॉस जैसी रजिस्टर्ड सोसायटियों के सीधे बैंक खातों में ही सहायता राशि भेजें।

साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत करें शिकायत
एस.एच.ओ. (साइबर सेल) सतबीर सिंह ने लोगों से अपील की है कि नेक इरादे से की जाने वाली मदद किसी अपराधी की जेब में न जाए, इसके लिए पहले जांचें, फिर मदद करें के नियम को अपनाएं। यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है, तो वह बिना किसी देरी के राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करे या तुरंत नजदीकी थाने के साइबर हेल्पडेस्क पर शिकायत दर्ज करवाए।


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Vatika

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