गुरदासपुर की आधी आबादी पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा! हो सकती है तबाही
punjabkesari.in Thursday, Jul 02, 2026 - 04:22 PM (IST)
गुरदासपुर (विनोद): गत साल 2025 के शुरू में गुरदासपुर शहर से निकलने वाले सेम नाला जिसे नबीपुर कट ड्रेन भी कहा जाता है, के सुधार तथा किनारों को पक्का करने के लिए सरकार ने 5 करोड़ 90 लाख रुपए खर्च किए थे, ताकि इस ड्रेन के सुधार से लोगों को राहत मिल सके। क्योंकि बरसात के मौसम में यह ड्रेन अपने दोनों तरफ बसी आबादी में तबाही मचाती थी। परंतु यदि इस ड्रेन का आज दौरा किया जाए तो पता चलता है कि इस बड़ी राशि खर्च करने के बावजूद ड्रेन में किसी तरह का सुधार दिखाई नहीं देता है तथा किनारों को कंक्रीट से पक्का करने के अतिरिक्त किसी तरह का सुधार दिखाई नहीं देता है। बरसात के मौसम में यदि इस ड्रेन में पानी बहुत अधिक आ गया तो बीते सालों की तरह यह ड्रेन अपने किनारों के दोनों तरफ बसे लोगों तथा कलोनियों में तबाही जरूर मचाएगी।
क्या इतिहास है इस महत्वपूर्ण नबीपुर कट ड्रेन का
लगभग 66 साल पहले जब गुरदासपुर शहर बहुत अधिक फैला नहीं था तो तब शहर के बाहरी इलाकों में खेतों में सेम की समस्या बहुत अधिक थी। बरसात का पानी खेतों में आ जाता था और खेतों से बाहर नहीं निकलता था। जिस कारण इस सेम के पानी से किसानों की फसलें हर साल खराब हो जाती थी। तब सरकार ने किसानों की फसलों को बचाने के लिए एक योजना बनाकर शहर के बाहरी इलाके में एक सेम नाले को बनाने का निर्णय लिया, ताकि खेतों से सेम का पानी इस नाले में आ जाए तथा किसानों की फसल सुरक्षित हो जाए। इस संबंधी वर्ष 1960 में इस सेम ड्रेन का निर्माण किया गया तथा किसान सेम की समस्या से मुक्त हो गए। परंतु समय के साथ गुरदासपुर शहर का विकास तथा फैलाव शुरू हो गया तथा इस ड्रेन के दोनों तरफ कई कालोनियां, मकान, कारोबार करने के लिए इमारतें आदि बनने लगी। अब स्थिति यह है कि इस ड्रेन के दोनों तरफ गुरदासपुर शहर की लगभग आधी आबादी बसी हुई है।
जब बरसात का मौसम आता है तो इस ड्रेन में पैदा हुई जड़ी बूटी से यह ड्रेन चोक हो जाती तथा किनारों के टूटने से ड्रेन का पानी ओवरफ्लो होकर कालोनियों, घरों, कारोबारी संस्थानों सहित अस्पतालों आदि में चल जाता। यह ड्रेन जो कभी किसानों के लिए लाभदायक थी शहर के लोगों के लिए एक अभिशाप साबित होना शुरू हो गई। स्थिति हर साल खराब हो जाने पर जिला प्रशासन ने सरकार से मिले 5 करोड़ 90 लाख रुपए की लागत से इस ड्रेन के दोनों तरफ के किनारों को कंक्रीट से पक्का कर दिया। ड्रेन में लोगों द्वारा डाली सीवरेज पाइपों को बंद कर दिया गया तथा ड्रेन पर बने सभी अवैध पुलों को गिरा दिया गया, ताकि ड्रेन के पानी के निकास में किसी तरह की रुकावट न हो। कुछ समय के लिए राहत तो मिली, परंतु स्थिति अब फिर खराब हो गई है। जबकि बरसात का मौसम सिर पर है।
गुरदासपुर शहर के बीचों बीच से गुजरने वाली इस ड्रेन के लगभग 3.5 किलोमीटर हिस्से के दोनों तरफ के किनारों को कंक्रीट से पक्का कर दिया गया था, ड्रेन की सफाई भी तब करवाई गई थी तथा इस ड्रेन में गिरने वाले सभी सीवरेज प्वाइंट को बंद कर दिया गया था।पंरतु आज यदि इस ड्रेन का दौरा किया जाए तो पता चलता है कि स्थिति लगभग पहले की तरह है। किनारों का कंक्रीट का काफी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है। ड्रेन में पहले की तरह जंगली जड़ी बूटी ने कब्जा कर लिया है तथा लोगों ने भी फिर से घरों तथा कालोनियों का सीवरेज निकास इस ड्रेन में डाल दिया है। शहर से निकलने वाली इस ड्रेन में अभी भी बड़ी संख्या में पुल बने हुए हैं तथा ड्रेन में पैदा हुई जड़ी बूटी बरसात में पानी अधिक आने से फिर ड्रेन चोक हो जाएगी।
जिससे ड्रेन का पानी ओवरफ्लो होकर कालोनियों, लोगों के घरों आदि में प्रवेश कर भारी नुकसान करेगा। क्योंकि ड्रेन के शहर के हिस्से को पक्का कर दिया गया है जबकि यह ड्रेन गांव सिरकियां से शुरू होकर नबीपुर गांव से आगे तक जाती है। जो लगभग 15 किलोमीटर है। जिस कारण बरसात के मौसम में यह ड्रेन फिर एक बार लोगों के लिए तबाही का कारण बनेगी।
क्या कहना है अधिकारियों का
यह नबीपुर कट ड्रेन जिसे सेम नाला भी कहा जाता है, ड्रेनज विभाग के अधीन आता है। इस विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जब यह ड्रेन बनी थी तो शहर के बाहरी इलाके खेतों में बनी थी, परंतु अब इस ड्रेन के दोनों तरफ बहुत अधिक आबादी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1991 में उस समय के डिप्टी कमिश्नर आई.डी. कंवर ने हालात को देखते हुए ड्रेन को बंद करने की योजना बनाई थी तथा विकल्प के रूप में शहर से काफी दूर इस ड्रेन को नए सिरे से बनाने के लिए सरकार को लिखा था, पंरतु तब राजनीतिक कारणों से यह योजना सिरे नहीं चढ सकी। अधिकारियों के अनुसार जैसे ही फंड मिलेंगे इस ड्रेन की सफाई तथा मुरम्मत करवाई जाएगी, परंतु अभी बरसात से पहले कुछ करना कठिन है।
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