बरनाला में सियासी घमासान: पूर्व नगर कौंसिल अध्यक्ष और कई कांग्रेसी नेताओं के खिलाफ पुलिस का Action

punjabkesari.in Friday, Apr 17, 2026 - 10:08 AM (IST)

बरनाला(विवेक सिंधुवानी, रवि): जिले में सियासी पारा उस समय चढ़ गया जब पुलिस ने शहर के सबसे व्यस्त 'कचहरी चौक' में धरना दे रहे कांग्रेसी नेताओं और वर्करों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए केस दर्ज कर लिया। इस एफ.आई.आर. (FIR) में न केवल कांग्रेस के बड़े चेहरे शामिल हैं, बल्कि विपक्षी दल अकाली दल से संबंधित एक नाम की मौजूदगी ने इस मामले को और भी चर्चा का विषय बना दिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई यातायात में बाधा डालने, जनता को परेशान करने और सरकारी ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों के साथ बदसलूकी करने के आरोपों के तहत की है।

​घटना का पूरा विवरण: क्या हुआ कचहरी चौक में?
​जानकारी के अनुसार, यह घटना 14 मार्च 2026 की है। थाना सिटी 2 बरनाला के मुख्य अधिकारी एस.आई. (SI) बलविंदर सिंह अपनी टीम के साथ, जिसमें सहायक थाना प्रभारी जगतार सिंह, हवलदार संदीप सिंह, सिमरजीत सिंह, महिला सिपाही वीरपाल कौर और अन्य कर्मचारी शामिल थे, कचहरी चौक पर सुरक्षा प्रबंधों के लिए तैनात थे। पुलिस के पास पहले से ही सूचना थी कि कांग्रेस पार्टी के वर्करों द्वारा वहां धरना दिया जाना है। ​दोपहर करीब 11:30 बजे, कांग्रेस पार्टी के कई प्रमुख पदाधिकारी और वर्कर वहां इकट्ठा हुए। शुरुआत में प्रदर्शनकारी सड़क के किनारे बैठकर नारेबाजी कर रहे थे, लेकिन कुछ ही देर में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस का आरोप है कि उक्त सभी व्यक्तियों और महिला नेताओं ने सड़क के दोनों ओर बैठकर पूर्ण जाम लगा दिया। इस कारण शहर की मुख्य धमनी मानी जाने वाली इस सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आम लोगों, मरीजों और मुसाफिरों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

​पुलिस के साथ तकरार और धक्का-मुक्की
​एस.आई. बलविंदर सिंह ने बताया कि जब पुलिस पार्टी ने प्रदर्शनकारियों से विनती की कि वे सड़क की साइड पर बैठकर शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करें ताकि आम जनता को दिक्कत न हो, तो प्रदर्शनकारी गुस्से में आ गए। रुक्के (पुलिस रिपोर्ट) में दर्ज है कि प्रदर्शनकारियों ने आवेश में आकर पुलिस पार्टी के साथ बहस की और धक्का-मुक्की शुरू कर दी। इस धक्का-मुक्की के कारण पुलिस की सरकारी ड्यूटी में सीधा व्यवधान पड़ा। काफी जद्दोजहद के बाद जब पुलिस ने सख्ती दिखाई, तो प्रदर्शनकारी मौके से तितर-बितर हो गए।

​नामित किए गए मुख्य नेता
​पुलिस ने इस मामले में कई स्थानीय राजनीतिक दिग्गजों को नामित किया है:
​मक्खन शर्मा: पूर्व अध्यक्ष नगर कौंसिल, बरनाला।
​महेश कुमार लोटा: पूर्व एम.सी. (पार्षद), बरनाला।
​नरिंदर शर्मा: स्टेट ऑब्जर्वर बठिंडा, कांग्रेसी नेता।
​जसप्रीत कौर: अध्यक्ष।
​मनमिंदर कौर पक्खो: जिला अध्यक्ष।
​रानी कौर: एम.सी.।
​लखविंदर सिंह उर्फ लक्की कंडा: पुत्र रंजीत सिंह, हल्का अध्यक्ष यूथ कांग्रेस।
​सुखविंदर सिंह उर्फ मुंदरी: एम.सी., धनौला।
​निर्मलजीत कौर: ब्लॉक समिति सदस्य।

​इसके अलावा टिंकू खान, परमिंदर सिंह उर्फ शमी ठुल्लीवाल (ब्लॉक अध्यक्ष महल कलां), गुरमेल सिंह मौड़, जसमेल सिंह डेयरीवाला (हल्का महल कलां), सरबजीत सिंह सरबा (पूर्व सरपंच), सतनाम सिंह (पूर्व सरपंच), बलदेव सिंह भुच्चर और भूपिंदर सिंह उर्फ कैप्टन सहित 15-20 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है।

​अकाली दल के नेता की संलिप्तता ने छेड़ी चर्चा
​इस पूरे घटनाक्रम में सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह है कि पुलिस ने कांग्रेसी नेताओं के साथ-साथ एक ऐसे व्यक्ति को भी नामित किया है जो शिरोमणि अकाली दल से संबंधित बताया जा रहा है। हालांकि, अकाली दल के इस नेता के नाम ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है।

​नए कानून BNS के तहत दर्ज हुआ मामला
​पुलिस ने यह कार्रवाई नए भारतीय कानून 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) की धाराओं के तहत की है:
​धारा 132: सरकारी कर्मचारी को उसकी ड्यूटी करने से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करना।
​धारा 221: सरकारी अधिकारी द्वारा जारी किए गए आदेशों की अवज्ञा।
​धारा 285: सार्वजनिक मार्ग में बाधा उत्पन्न करना जिससे आम लोगों को खतरा या परेशानी हो।
​एस.आई. बलविंदर सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों ने न केवल यातायात जाम किया, बल्कि जनता को भारी 'हैरसमेंट' (परेशानी) दी। पुलिस ने मौके के वीडियो और सी.सी.टी.वी. फुटेज को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। मुकदमा दर्ज करने के बाद इसकी प्रतियां उच्च अधिकारियों और इलाका मजिस्ट्रेट को भेज दी गई हैं।

​सियासी विरोध या सार्वजनिक परेशानी?
​एक ओर जहां कांग्रेसी नेता इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की आवाज दबाने की कोशिश और राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं, वहीं पुलिस का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है। सड़कें जाम करके आम नागरिकों के जीवन को अस्त-व्यस्त करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। ​आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर बरनाला की राजनीति में और भी तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है। क्या यह गिरफ्तारियों की ओर बढ़ेगा या राजनीतिक दबाव में कोई नया मोड़ आएगा, यह देखना अभी बाकी है।


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Vatika

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