जालंधर बाईपास प्रदूषण जांच केंद्र फिर विवादों में! पहले भी लग चुके हैं आरोप
punjabkesari.in Tuesday, Jun 23, 2026 - 12:48 PM (IST)
लुधियाना (राम) : जालंधर बाईपास स्थित इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप परिसर में संचालित प्रदूषण जांच केंद्र एक बार फिर विवादों में आ गया है। वाहन चालकों ने केंद्र पर निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक राशि वसूलने के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता विनय वर्मा का दावा है कि उनसे प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र बनवाने के लिए कुल 500 रुपये मांगे गए, जबकि निर्धारित शुल्क इससे काफी कम है।
विनय वर्मा के अनुसार केंद्र के कर्मचारियों ने बताया कि 100 रुपये प्रदूषण जांच शुल्क है, जबकि 400 रुपये वाहन नंबर को सिस्टम में जोड़ने (एनएल लिंक) और नंबर प्लेट लिंक करने के नाम पर लिए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके सामने मौजूद दो अन्य वाहन चालकों से भी इसी तरह 500-500 रुपये वसूले गए। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब उन्होंने अतिरिक्त 400 रुपये के संबंध में कोई रसीद या लिखित दस्तावेज मांगा तो केंद्र के कर्मचारियों ने कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया।
उनका आरोप है कि वहां मौजूद कुछ कर्मचारियों को प्रक्रिया संबंधी पूरी जानकारी भी नहीं थी। मामले की पड़ताल के दौरान केंद्र के केबिन में मौजूद एक युवती ने कथित तौर पर बताया कि उसके वरिष्ठ कर्मचारी “स्वीटी” के निर्देशानुसार कुल 500 रुपये लिए जा रहे हैं। इसमें 100 रुपये प्रदूषण जांच शुल्क और 400 रुपये अन्य प्रक्रिया के नाम पर शामिल हैं। जब अतिरिक्त राशि का आधार पूछा गया तो कथित तौर पर जवाब दिया गया कि यदि ग्राहक यह शुल्क नहीं देना चाहता तो वह अपना कार्य आरटीओ कार्यालय से करवा सकता है।
शिकायतकर्ता के अनुसार बाद में संबंधित कर्मचारी स्वीटी से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। वहीं पंजाब केसरी की टीम ने भी उनका पक्ष जानने के लिए कई बार संपर्क किया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।
इस संबंध में पेट्रोल पंप के मैनेजर ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदूषण जांच केंद्र पेट्रोल पंप प्रबंधन के सीधे नियंत्रण में नहीं है। यह केंद्र टेंडर प्रक्रिया के तहत संचालित किया जाता है और शुल्क संबंधी निर्णय संबंधित संचालकों द्वारा लिए जाते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंजाब एग्रो के पूर्व परिसर में संचालित इस प्रदूषण केंद्र पर लंबे समय से इस प्रकार की शिकायतें सामने आती रही हैं। लोगों का कहना है कि शहर के अन्य कुछ प्रदूषण जांच केंद्रों पर भी निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूलने के आरोप लगते रहे हैं। उनका दावा है कि अतिरिक्त राशि लेने के बावजूद कोई वैध रसीद या आधिकारिक दस्तावेज नहीं दिया जाता। शिकायतकर्ता ने प्रशासन और परिवहन विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि प्रदूषण प्रमाणपत्र निर्धारित सरकारी शुल्क पर ही जारी किए जाएं।
इतना है प्रदूषण प्रमाणपत्र का निर्धारित शुल्क
जानकारों के अनुसार कारों के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र का शुल्क वाहन के ईंधन प्रकार के अनुसार तय होता है। पेट्रोल, सीएनजी और एलपीजी वाहन के लगभग 80 से 115 रुपये, डीजल वाहन के लगभग 100 से 130 रुपये हैं। यदि किसी केंद्र पर निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूली जाती है तो वाहन मालिक परिवहन विभाग, आरटीओ या संबंधित अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज करवा सकता है।
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