कैप्टन और सिद्धू में ‘ब्रिज’ की भूमिका निभाएंगे टकसाली कांग्रेसी लाल सिंह

7/25/2021 10:42:50 AM

पटियाला(राजेश पंजौला): मिशन-2022 को फतह करने और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र तथा पंजाब के नवनियुक्त प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू में तालमेल बिठाने के लिए कांग्रेस हाईकमान हरसंभव यत्न कर रही है। सूत्रों के अनुसार पंजाब कांग्रेस के प्रधान रह चुके और डेढ़ दर्जन विभागों के मंत्री व 6 बार विधायक रह चुके मंडी बोर्ड के मौजूदा चेयरमैन (कैबिनेट मंत्री रैंक) लाल सिंह मुख्यमंत्री अमरेंद्र और सिद्धू में ‘ब्रिज’ की भूमिका निभाएंगे।

कांग्रेस पर कई बार संकट आए, कई बार कांग्रेस पार्टी टूटी पर लाल सिंह ही एकमात्र ऐसे नेता हैं जो हमेशा गांधी परिवार की अगुवाई वाली कांग्रेस पार्टी के साथ खड़े रहे। यही कारण है कि कांग्रेस हाईकमान का लाल सिंह प्रति विशेष सम्मान है। लाल सिंह चाहते हैं कि कैप्टन अमरेंद्र और नवजोत सिद्धू एकजुट रहें। अगर दोनों नेता एकजुट रहते हैं तो कांग्रेस ऐतिहासिक जीत हासिल कर सकती है। पंजाब सरकार और अन्य एजैंसियों द्वारा करवाए गए सर्वे स्पष्ट करते हैं कि मौजूदा समय में पंजाब का राजनीतिक वातावरण कांग्रेस पार्टी के हक में है। नवजोत सिद्धू के प्रधान बनने के बाद पंजाब भर में पार्टी पूरी तरह एक्टीवेट हो गई है। कांग्रेस हाईकमान इस वातावरण का लाभ लेना चाहती है।

अगर लाल सिंह मौजूदा कैबिनेट का हिस्सा होते तो हावी न होती अफसरशाही
पंजाब के समूह कांग्रेसी विधायक, पार्टी के अधिकारी और वर्कर अक्सर कहते हैं कि अगर लाल सिंह कैप्टन अमरेंद्र सिंह की मौजूदा कैबिनेट का हिस्सा होते तो अफसरशाही को कभी हावी न होने देते। 2002 वाली कैप्टन अमरेंद्र सरकार समय लाल सिंह वित्त मंत्री, ग्रामीण विकास व पंचायत मंत्री, सिंचाई मंत्री सहित अन्य कई अहम विभागों के मंत्री रहे हैं। उस समय कांग्रेसी वर्करों की पूरी सुनवाई होती थी और अफसरशाही सिर्फ सरकार के फैसले लागू करने तक सीमित थी। उसका राजनीतिक फैसलों में कोई दखल नहीं था।  मौजूदा समय ज्यादातर मंत्रियों की कोई सुनवाई नहीं।

कई विभागों के प्रिंसीपल सैक्रेटरी अपने मंत्रियों की परवाह नहीं करते। कोई भी मंत्री मुख्यमंत्री के पास जाकर अपने विभाग की अहम फाइल क्लीयर नहीं करवा सकता। सबको अपने काम करवाने के लिए चीफ प्रिंसीपल सैक्रेटरी सुरेश कुमार की ‘मिन्नतें’ करनी पड़ती हैं, जिस करके ही मंत्रियों और विधायकों में कैप्टन अमरेंद्र के प्रति गुस्सा है। अक्सर कांग्रेसी कहते हैं कि मुख्यमंत्री बिल्कुल ठीक हैं परन्तु उनके आस-पास जो अफसरशाही है, वह कांग्रेस की बेड़ी में बट्टे डाल रही है। अगर लाल सिंह कैबिनेट में होते तो उन्होंने अफसरशाही की लगाम कस कर रखनी थी।  2002 में भी उन्होंने कांग्रेसी विधायकों, नेताओं और मुख्यमंत्री में कड़ी का काम किया था, इस बार यह कड़ी गायब है, जिस कारण इतनी बड़ी संख्या में विधायक मुख्यमंत्री से नाराज हैं।

लाल सिंह पर कैप्टन अमरेंद्र सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू और हाईकमान करती है विश्वास
मौजूदा कांग्रेसी विधायकों में से सिर्फ लाल सिंह ही एकमात्र ऐसे विधायक हैं जो 1977 में विधायक बने थे। वह सबसे पुराने कांग्रेसी हैं। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह के विश्वासपात्र हैं। पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू के पिता के साथ उनके अति नजदीकी संबंध थे, जिस करके सिद्धू भी उन पर विश्वास करते हैं। कांग्रेस हाईकमान पहले ही लाल सिंह पर पूरा विश्वास करती है। लाल सिंह का एक एजैंडा होता है कि पंजाब में कांग्रेस की सरकार बने। वह बेशक कुछ बनें न बनें परन्तु कांग्रेस का झंडा बुलंद होना चाहिए। उनकी इस सोच से ही समूची कांग्रेस उनका सम्मान करती है और उनकी बात पर ध्यान देती है। लाल सिंह कांग्रेस को एकजुट करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं, इसीलिए हाईकमान ने उनको यह जिम्मेदारी दी है।


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Content Writer

Vatika

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