लुधियाना की सिटी बस सेवा पर संकट, कोर्ट ने 120 बसों की कुर्की-नीलामी के दिए आदेश
punjabkesari.in Thursday, Jun 18, 2026 - 08:41 AM (IST)
लुधियाना(राज): महानगर की चरमराती सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था (पब्लिक ट्रांसपोर्ट) को उस समय सबसे बड़ा झटका लगा, जब स्थानीय अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए 'लुधियाना सिटी बस सर्विसेज लिमिटेड' (LCBSL) की 120 जे.एन.एन.यू.आर.एम. (JNNURM) बसों को कुर्क करने और उनकी नीलामी करने के लिखित आदेश जारी कर दिए। कोर्ट के इस कड़े फैसले के बाद औद्योगिक नगरी की सड़कों पर दौड़ रही सिटी बस सेवा के पूरी तरह से वेंटिलेटर पर जाने और ठप होने का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। अदालत की विशेष टीम ने माता रानी चौक स्थित नगर निगम के जोन-ए कार्यालय के कमरा नंबर 50 के बाहर बकायदा नीलामी संबंधी कानूनी नोटिस चस्पा कर दिया है। माननीय अदालत ने इन सभी बसों की नीलामी के लिए 2 जुलाई 2026 की तारीख मुकर्रर की है, जबकि इसकी मुकम्मल रिपोर्ट 7 जुलाई तक हर हाल में कोर्ट में पेश करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
किराया न बढ़ाने के विवाद से सुलगती रही चिंगारी, 6.88 करोड़ का फंसा पेंच
यह पूरा कानूनी विवाद 'लुधियाना सिटी बस सर्विसेज लिमिटेड' और प्राइवेट बस ऑपरेटर कंपनी 'होराइजन कनेक्ट ट्रांसवेज प्राइवेट लिमिटेड' के बीच लंबे समय से चल रही खींचतान का नतीजा है। निजी कंपनी का आरोप था कि डीजल की बढ़ती कीमतों और परिचालन लागत में भारी इजाफे के बावजूद नगर निगम ने बस किराए में कोई संशोधन (बढ़ोतरी) नहीं किया, जिससे कंपनी को करोड़ों रुपये का वित्तीय घाटा झेलना पड़ा।
निगम अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो मामला अदालत की चौखट पर पहुंचा। मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) प्रक्रिया के तहत जनवरी 2024 में कोर्ट ने कंपनी के हक में फैसला सुनाते हुए एल.सी.बीएस.एल. को 6.88 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का हुक्म सुनाया था।
हाईकोर्ट के आदेश की नाफरमानी पड़ी भारी, कैश जमा न कराने पर फंसा निगम
स्थानीय अदालत के इस फैसले को दबाने के लिए नगर निगम ने पहले जिला अदालत और फिर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां भी निगम को कोई बड़ी राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने बीच का रास्ता निकालते हुए निगम को आदेश दिए थे कि वह कुल मुआवजा राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा नकद (F.D. के रूप में) और बाकी का 50 प्रतिशत हिस्सा बतौर सिक्योरिटी जिला एवं सत्र न्यायालय में जमा करवाए। नगर निगम ने कागजी सुरक्षा राशि तो जमा करवा दी, लेकिन हाईकोर्ट की मुख्य शर्त के मुताबिक नकद राशि (कैश) जमा करवाने में पूरी तरह नाकाम रहा। इसी लापरवाही के चलते अब अदालत ने बसों को जब्त कर नीलाम करने का डंडा चला दिया है।
अधिकारियों के वेतन होंगे कुर्क, दर्ज होगी F.I.R.: कंपनी
'होराइजन कनेक्ट ट्रांसवेज प्राइवेट लिमिटेड' के एक उच्चाधिकारी ने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा कि हमने इस मसले को आपसी सहमति से सुलझाने का हर संभव प्रयास किया था, लेकिन निगम के अड़ियल अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। अब कंपनी अदालत में अवमानना (Contempt of Court) का केस दायर करेगी और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज कराने की मांग करेगी। अधिकारी ने यह भी दावा किया कि 120 बसों को बेचकर भी पूरा हर्जाना वसूल नहीं होगा, इसलिए अब कंपनी एल.सी.बीएस.एल. के निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) में शामिल बड़े अफसरों की तनख्वाह (वेतन) कुर्क करवाने के लिए अदालत में नई अर्जी लगाएगी।
कमिश्नर बोले- लीगल टीम से करेंगे बात, जनता पर मंडराया संकट
दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर अनभिज्ञता जताते हुए नगर निगम के कमिश्नर ओजस्वी अलंकार ने कहा कि फिलहाल उनके संज्ञान में नीलामी का कोई नोटिस नहीं आया है। वह जल्द ही अपनी लीगल (कानूनी) टीम के साथ इस गंभीर विषय पर बैठक करेंगे और कोई बीच का रास्ता निकालने का प्रयास किया जाएगा। काबिलेगौर है कि यदि 2 जुलाई को इन 120 बसों पर सरकारी हथौड़ा चल गया, तो लुधियाना में बचे हुए महज दो रूटों पर चल रही बस सेवा भी हमेशा के लिए बंद हो जाएगी, जिससे रोजाना सफर करने वाले हजारों गरीब और मध्यमवर्गीय यात्रियों की जेब पर ऑटो चालकों की मार पड़नी तय है।

