लुधियाना सिविल अस्पताल भगवान भरोसे! 1 साल से फोरेंसिक एक्सपर्ट के दोनों पद खाली

punjabkesari.in Thursday, Jul 09, 2026 - 12:23 PM (IST)

लुधियाना (राज): महानगर के सबसे बड़े सरकारी सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे की पोल खोलने वाला एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर प्रशासनिक मामला सामने आया है। पंजाब के सबसे बड़े और सबसे संवेदनशील जिलों में शुमार लुधियाना के जिला सिविल अस्पताल में पिछले पूरे एक वर्ष से रेगुलर फोरेंसिक मेडिसिन एक्सपर्ट (Forensic Medicine Expert) के दोनों पद पूरी तरह खाली पड़े हैं। इसके चलते जिले में होने वाले हत्या, आत्महत्या और संदिग्ध मौतों के पोस्ट-मार्टम (शवों की जांच) सहित अदालती मामलों से जुड़े मेडिको-लीगल ओपिनियन (Medico-Legal Opinions) बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। लापरवाही का आलम यह है कि यह गंभीर मुद्दा अब पंजाब मानवाधिकार आयोग (Punjab Human Rights Commission) के कटघरे में पहुंच चुका है, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।

एक्सपर्ट्स की कमी का रोना: प्राइवेट अस्पतालों के आगे हाथ फैलाने को मजबूर सरकारी तंत्र 

आंकड़ों पर नजर डालें तो लुधियाना के नामी प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के पास फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की कोई कमी नहीं है, लेकिन सरकारी अस्पताल पूरी तरह कंगाल हो चुके हैं। इस समय DMCH (डी.एम.सी.एच.): के पास 4 फोरेंसिक एक्सपर्ट मौजूद हैं, CMCH (सी.एम.सी.एच.): के पास 3 विशेषज्ञ अपनी सेवाएं दे रहे हैं, ESIC मॉडल अस्पताल: के पास भी 1 एक्सपर्ट तैनात है। इसके विपरीत, जहां रोज़ाना दर्जनों की संख्या में पुलिस केस और शव पोस्टमार्टम के लिए आते हैं। जिला सिविल अस्पताल फिलहाल दूसरे डॉक्टरों और बाहरी संस्थानों के आगे हाथ फैलाकर जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है।

विभाग की वीआईपी मेहरबानी— एक ही डॉक्टर पर दोराहा और चंडीगढ़ की दोहरी जिम्मेदारी! 

सेहत विभाग के अंदरूनी सूत्रों ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि विभाग ने दोराहा स्थित कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (CHC) में एक फोरेंसिक एक्सपर्ट डा. चरणकमल को एस.एम.ओ. (SMO) के तौर पर वीआईपी तैनाती दे रखी है, जहां वह हफ्ते में सिर्फ 3 दिन अपनी सेवाएं देते हैं। इसके साथ ही वह चंडीगढ़ में 'असिस्टेंट डायरेक्टर मेडिको लीगल सर्विसेज' जैसी बेहद रसूखदार और बड़ी जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। गौर हो कि डा. चरणकमल साल 2021 से सितंबर 2024 तक लुधियाना सिविल अस्पताल में ही तैनात थे, लेकिन बाद में उनका तबादला केमिकल लैब में कर दिया गया। उनके बाद खन्ना से एक अन्य एक्सपर्ट को मार्च से अक्टूबर 2025 तक तीन दिन के लिए काम चलाने हेतु सिविल अस्पताल भेजा गया था, लेकिन अब एक साल से अस्पताल पूरी तरह राम-भरोसे है।

इम्पैनलमेंट पॉलिसी में भी बड़ी चूक; प्राइवेट डॉक्टरों से नहीं ली जा रही मेडिको-लीगल राय 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पंजाब स्वास्थ्य विभाग की ओर से सरकारी अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भारी कमी को देखते हुए प्राइवेट डॉक्टरों की मदद लेने के लिए 'इम्पैनलमेंट पॉलिसी' (Empanelment Policy) बनाई गई है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस पॉलिसी में फोरेंसिक एक्सपर्ट्स को शामिल ही नहीं किया गया है! इसके कारण प्राइवेट डॉक्टरों की मदद मेडिको-लीगल ओपिनियन में नहीं ली जा पा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस पॉलिसी में फोरेंसिक मेडिसिन एक्सपर्ट्स को भी शामिल कर लिया जाए, तो जिला सिविल अस्पताल जैसे बड़े सरकारी चिकित्सा केंद्रों को बहुत बड़ी राहत मिल सकती है।

सिविल सर्जन ने भेजी रिपोर्ट, जब तक पक्की भर्ती नहीं, तब तक 'उधार' के डॉक्टरों का सहारा, कामकाज प्रभावित नहीं होने देंगे: डा. रमनदीप कौर 

इस गंभीर संकट पर बात करते हुए लुधियाना की सिविल सर्जन डाक्टर रमनदीप कौर ने माना कि अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी है। विभाग को लिखा पत्र: उन्होंने कहा कि जिला सिविल अस्पताल में नियमित फोरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ की तुरंत नियुक्ति सुनिश्चित करने के लिए उच्चाधिकारियों और सेहत विभाग को विशेष मांग पत्र भेजा जा चुका है। सिविल सर्जन ने दावा किया कि जब तक रेगुलर डॉक्टरों की पक्की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक कामकाज को ठप नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए सीएमसी (CMC), डीएमसीएच (DMCH), ईएसआई (ESI) अस्पताल और दोराहा के फोरेंसिक विशेषज्ञों की ऑन-कॉल मदद ली जा रही है ताकि जनता और पुलिस को परेशानी न हो।

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News Editor

Kalash

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