लुधियाना में पुलिस के सर्च ऑपरेशन के 3 दिन बाद फिर बिकने लगा नशा, तस्कर बेखौफ!
punjabkesari.in Thursday, Oct 15, 2026 - 09:30 AM (IST)
लुधियाना(राज) : महानगर को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे व्यापक अभियानों और दावों की जमीनी हकीकत थाना डिवीजन नंबर-7 के अधीन आती बिहारी कॉलोनी में उजागर हो रही है। तीन दिन पहले ही शहर के डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन और पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा के नेतृत्व में कई डीसीपी, एडीसीपी, एसीपी और एसएचओ सहित भारी पुलिस बल ने बिहारी कॉलोनी को चारों तरफ से घेरकर नशा तस्करों में खौफ पैदा करने के लिए विशेष घेराबंदी व तलाशी अभियान चलाया था। हालांकि, आला अधिकारियों का काफिला लौटते ही नशा तस्करों पर इस बड़े सर्च ऑपरेशन का कोई असर देखने को नहीं मिला। मंगलवार रात इसी बिहारी कॉलोनी में एक बार फिर नशा बेचने और खरीदने वालों की खुलेआम कतारें लगी दिखाई दीं जिससे पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अफसरों की भारी मौजूदगी के बावजूद बेखौफ दिखे तस्कर
उल्लेखनीय है कि शहर में घोड़ा कालोनी के बाद अब बिहारी कॉलोनी को नशे का पुराना हॉटस्पॉट माना जाता रहा है जहां संबंधित एसीपी और एसएचओ अपने स्तर पर समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाने का दावा करते रहे हैं। तस्करों की रीढ़ तोडऩे और उनमें कानून का खौफ पैदा करने के लिए हाल ही में डी.सी. और सी.पी. खुद भारी पुलिस अमले के साथ यहां गलियों में उतरे थे। उम्मीद जताई जा रही थी कि इस बड़े एक्शन के बाद तस्कर इलाका छोड़ देंगे या धंधा बंद हो जाएगा। इसके उलट मंगलवार रात का नजारा चौंकाने वाला था तस्कर बेखौफ होकर गलियों में सक्रिय नजर आए और नशा खरीदने पहुंचे युवकों का तांता लगा रहा।
लोगों का आरोप, मछलियों पर कार्रवाई, मगरमच्छ खुलेआम घूम रहे
इलाके के स्थानीय निवासियों ने पुलिसिया रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस का ध्यान केवल लती हो चुके नशेडिय़ों पर कार्रवाई करने तक सीमित रहता है। लोगों का कहना है कि जब तक नशा बेचने वाले मुख्य सप्लायर और सौदागर खुलेआम घूमते रहेंगे, तब तक नशेड़ी यहां आते रहेंगे। आरोप है कि बड़े तस्करों पर ठोस कानूनी शिकंजा न कसे जाने के कारण वे कुछ ही घंटों के भीतर फिर से अपना जाल फैला लेते हैं। निवासियों ने बताया कि मंगलवार रात भी कई संदिग्ध युवक खुलेआम नशा सप्लाई करते देखे गए, जिससे मोहल्ले के संभ्रांत परिवारों, महिलाओं और बच्चों में भय का माहौल बना हुआ है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
बिहारी कॉलोनी के ताजा घटनाक्रम ने कमिश्नरेट पुलिस के नशा विरोधी अभियान की रणनीतिक प्रभावशीलता पर बहस छेड़ दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस इलाके में खुद डिप्टी कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर कई अधिकारियों के साथ सीधे जमीन पर उतरे हों, अगर उसी एक कॉलोनी में नशा माफिया को जड़ से उखाडऩे में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है, तो समूचे महानगर के अन्य संवेदनशील इलाकों में नशे की बिक्री पर पूरी तरह लगाम कैसे कसी जाएगी? स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सर्च अभियानों को केवल औपचारिक खानापूर्ति बनाने के बजाय मुख्य तस्करों की पहचान कर उन्हें गैर-जमानती धाराओं में जेल भेजा जाए और इलाके में 24 घंटे पक्की पुलिस पिकेट तैनात की जाए।

