महानगर के पॉश इलाके में करोड़ों की जमीन पर बड़ा घोटाला, 13 लोगों पर केस दर्ज

punjabkesari.in Friday, Mar 13, 2026 - 10:36 AM (IST)

लुधियाना (राज): महानगर के पॉश इलाके साउथ सिटी सिधवां नहर के पास करोड़ों रुपए की बेशकीमती जमीन को जाली दस्तावेजों के सहारे खुर्द-बुर्द करने का एक बड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है। 'जनपथ एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड' कंपनी की 11 कनाल 8 मरला जमीन को हड़पने के लिए कुछ लोगों ने न केवल फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन तैयार किए, बल्कि बैंक डेट में जाली एग्रीमेंट भी बना डाले। इस मामले में स्थानीय अदालत के सख्त आदेशों के बाद थाना पी.ए.यू. की पुलिस ने पवन कुमार गोयल, विनय सिंघल और प्रदीप अग्रवाल समेत 13 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

अदालत के हस्तक्षेप के बाद हरकत में आई पुलिस, डायरेक्टर ने खोला मोर्चा

यह मामला कंपनी के डायरेक्टर महेश गोयल की शिकायत पर दर्ज हुआ है। गोयल का आरोप है कि गांव झम्मट स्थित कंपनी की प्राइम लैंड पर उनके ही कुछ पार्टनर और उनके सहयोगियों की नीयत खराब हो गई। उन्होंने पुलिस को बताया कि बिना किसी बोर्ड मीटिंग या उनकी सहमति के 10 अप्रैल 2023 का एक फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन तैयार किया गया। इसके बाद जालसाजों ने 2025 में फर्जी अथॉरिटी लेटर और जी.पी.ए. बनाकर प्रदीप अग्रवाल को जमीन बेचने के अधिकार दे दिए। हैरानी की बात यह है कि महेश गोयल ने अगस्त 2025 में भी पुलिस को शिकायत दी थी, लेकिन तब कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

 बैक डेट एग्रीमेंट और फरीदकोट के स्टांप पेपर ने खोली पोल

इस पूरे फर्जीवाड़े का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जमीन के एग्रीमेंट 30 नवंबर 2021 की बैक डेट में दिखाए गए। शिकायतकर्ता के अनुसार, ये एग्रीमेंट जिन स्टांप पेपरों पर प्रिंट किए गए, वे साल 2020 में फरीदकोट जिले के लिए जारी हुए थे, जबकि विवादित जमीन लुधियाना में स्थित है। इसी तकनीकी चूक ने आरोपियों की पूरी साजिश की पोल खोल दी। फर्जीवाड़े की इस फेहरिस्त में राजेश कुमार, चमन लाल, सलील गोयल, राकेश गोयल, खुशबू बंसल, कंचन बंसल, विवेक गोयल, रविंदर कुमार जैन और अमिता जैन को कथित खरीदार के रूप में शामिल किया गया है।

धमकियां दी और रातों-रात निर्माण की कोशिश की

महेश गोयल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब उन्होंने इस फर्जीवाड़े का विरोध किया और दस्तावेजों को रद्द करने की मांग की, तो आरोपियों ने उन्हें डराया-धमकाया। इतना ही नहीं, जमीन पर कब्जा करने और इसकी प्रकृति बदलने के लिए वहां निर्माण कार्य भी शुरू करने की कोशिश की गई। अब अदालत ने पुलिस रिपोर्ट और दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद माना है कि यह मामला गंभीर जालसाजी और कंपनी रिकॉर्ड में हेरफेर का है। थाना पी.ए.यू. के एस.एच.ओ. राजिंदर सिंह का कहना है कि एफ.आई.आर. दर्ज कर ली गई है और अब सभी विवादित दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच करवाई जाएगी ताकि इस बड़े स्कैम की तह तक पहुंचा जा सके।

अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here


सबसे ज्यादा पढ़े गए

News Editor

Urmila

Related News