Ludhiana : कागजों में विकास, जमीनी हकीकत और, एक बार फिर नगर निगम अफसरों की खुली पोल!
punjabkesari.in Saturday, Mar 14, 2026 - 12:04 PM (IST)
लुधियाना (हितेश): नगर निगम की बी. एंड आर. ब्रांच के अफसरों द्वारा विकास कार्यों के नाम पर फर्जीवाड़ा करने की पोल एक बार फिर एफ. एंड सी.सी. में खुल गई है। यहां बताना उचित होगा कि विधानसभा चुनावों में सियासी लाभ लेने के उद्देश्य से नए विकास कार्यों के लिए टैंडर लगाने से लेकर वर्क आर्डर जारी करने के लिए जो मुहिम चल रही है, उसके तहत फरवरी से लेकर अब तक आधा दर्जन बार एफ. एंड सी.सी. की मीटिंग बुलाई गई है।
इस दौरान लगभग हर मीटिंग में बी. एंड आर. ब्रांच के अफसरों द्वारा गैर-जरूरी विकास कार्यों के लिए एस्टीमेट बनाने का खुलासा हो रहा है जिसका सबूत पिछली कई मीटिंगों के दौरान विकास कार्यों के प्रस्ताव पैंडिंग या रद्द करने के फैसले के रूप में सामने आया है। यही माहौल शुक्रवार को हुई एफ. एंड सी.सी. की मीटिंग में देखने को मिला जहां राम पार्क के निर्माण पर करीब 40 लाखों खर्च करने का प्रस्ताव आया तो डिप्टी मेयर द्वारा एतराज दर्ज किया गया

जिस पर नगर निगम की लगभग सभी अहम ब्रांचों के साथ जोन-सी की बी. एंड आर. ब्रांच पर भी काबिज एस.ई. शाम लाल गुप्ता अपने ही बनाए एस्टीमेट का जवाब नहीं दे पाए, क्योंकि डिप्टी मेयर द्वारा मुद्दा उठाया गया कि जिस पार्क की कायाकल्प पर लाखों खर्च करने की सिफारिश की गई है, वह ठीक हालत में है। इसी तरह एस्टीमेट में पार्क की पुरानी ग्रिल, ईंटों व अन्य मैटीरियल की रिकवरी का भी कोई जिक्र नहीं था।
इस संबंध में एस.ई. शाम लाल गुप्ता ने मीटिंग में से ही एस.डी.ओ. से फोन लगाया तो वह भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया जिससे साफ हो गया नगर निगम की बी. एंड आर. ब्रांच के अफसरों द्वारा विकास कार्यों के एस्टीमेट बनाने की प्रक्रिया के दौरान साइट विजिट करने की बजाय ऑफिस में बैठकर आंखें बंद करके फाइलों पर साइन किए जा रहे हैं जिसके मद्देनजर कमिश्नर ने नाराजगी जताई और एस.ई.- एक्सियन को आगे से उनके द्वारा तैयार किए गए किसी भी प्रस्ताव की पूरी स्टडी करने के बाद ही एफ. एंड सी.सी. की मीटिंग में आने के लिए बोला है।
5वीं बार भी फाइनल नहीं हुआ एजैंडा
मेयर द्वारा 18 फरवरी को बुलाई गई एफ. एंड सी.सी. की मीटिंग के लिए एक साथ 300 प्रस्तावों का एजैंडा जारी कर दिया गया था लेकिन डिप्टी मेयरों ने स्पष्ट किया हुआ है कि एक बार में 100 प्रस्तावों पर ही चर्चा की जाए जिसके तहत लगातार 2 दिन मीटिंग करके 100-100 प्रस्ताव क्लीयर किए गए। इसके बाद एक बार बुलाई गई मीटिंग में कमिश्नर सहित अन्य अफसर नहीं पहुंचे। फिर 6 मार्च को हुई मीटिंग में पिछले 200 के साथ 100 और नए मिलाकर करीब 300 प्रस्तावों पर फैसला ले लिया गया।
जहां तक उस दिन टेबल आइटम के रूप में पेश किए गए बाकी एजैंडे का सवाल है, वह डिप्टी मेयरों की असहमति के चलते फाइनल नहीं हो पाया। अब शुक्रवार की मीटिंग में 15 प्रस्तावों पर चर्चा के बाद विकास कार्यों के लिए फर्जी तरीके से एस्टीमेट बनाने को लेकर विवाद खड़ा होने की वजह से एक बार फिर मीटिंग पैंडिंग करनी पड़ी।
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