Shivalik Hills मामले में NGT ने बढ़ाया स्टे, संशोधन के बाद भी क्यों नहीं थमा विवाद
punjabkesari.in Saturday, Apr 11, 2026 - 06:32 PM (IST)
चंडीगढ़ : शिवालिक पहाड़ियों से जुड़े डीलिस्टेड क्षेत्रों में फार्म हाउस निर्माण नीति को लेकर चल रहे एक मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मौजूदा स्टे को जारी रखा है। यह मामला O.A. 626/2025 के तहत “लो इम्पैक्ट ग्रीन हैबिटेट्स पॉलिसी 2025” से जुड़ा हुआ है।
माननीय NGT ने सुनवाई के दौरान पाया कि पंजाब सरकार निर्धारित तिथि 09 अप्रैल 2026 तक भी अपना जवाब दाखिल नहीं कर सकी। मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रिब्यूनल ने किसी भी प्रकार की कार्रवाई या अनुमति पर लगी रोक को आगे बढ़ाते हुए अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 तय की है।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए इंजीनियर कपिल अरोड़ा और अन्य सदस्यों ने दलील दी कि 20 नवंबर 2025 को जारी नीति के तहत डीलिस्टेड क्षेत्रों में स्थायी निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जा रही थी, जो उनके अनुसार सुप्रीम कोर्ट के 09 सितंबर 2025 के आदेश के विपरीत है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि ऐसी भूमि का उपयोग केवल कृषि और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों तक ही सीमित रहेगा।
इसी आधार पर काउंसिल ऑफ इंजीनियर्स ने नीति को चुनौती देते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा 07 अप्रैल 2026 को किए गए संशोधन के बावजूद अभी भी 15 प्रतिशत तक स्थायी निर्माण की अनुमति दी जा रही है, जिसे वे पर्यावरणीय नियमों के खिलाफ मानते हैं।
वहीं याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि पर्यावरण मंत्रालय के 2015 और 2018 के निर्देशों तथा इको-टूरिज्म पॉलिसी 2018 के अनुसार ऐसे क्षेत्रों में स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। फिलहाल NGT ने मामले की अगली सुनवाई तक स्टे जारी रखते हुए सभी पक्षों से विस्तृत जवाब मांगा है।

