Punjab: हाजिरी को लेकर अध्यापकों के लिए पड़ा पंगा, जानें क्या है पूरा मामला

punjabkesari.in Friday, Apr 10, 2026 - 12:27 PM (IST)

लुधियाना(विक्की): पंजाब के सरकारी स्कूलों में लागू किया गया एम. स्टार ई-पंजाब ऑनलाइन अटैंडैंस सिस्टम अध्यापकों के लिए भारी सिरदर्द बन गया है। शिक्षा विभाग और एक निजी कंपनी द्वारा तैयार किया गया यह ऐप जमीनी स्तर पर पूरी तरह फेल साबित हो रहा है। जब पूरे पंजाब के अध्यापक अपनी और विद्यार्थियों एक साथ हाजिरी लगाने की कोशिश करता है, तो सर्वर ठप्प हो जाता है। अध्यापकों को सुबह-सुबह 'क्लॉक इन' करने के बाद ऐप खुद-ब-खुद 'क्लॉक आऊट' कर देता है, जिससे सारा दिन हाजिरी के चक्कर में ही बर्बाद हो जाता है। तकनीकी खामियों के चलते कई बार अध्यापक स्कूल में मौजूद होने के बावजूद ऑनलाइन गैर-हाजिर दिखाई देते हैं, जो उनके लिए मानसिक परेशानी का कारण बन रहा है।

ऐप और गूगल शीट की भरमार ने विद्यार्थियों से छीना कीमती समय
विभागीय आदेशों के कारण अध्यापक अब शिक्षक की जगह 'डाटा एंट्री ऑप्रेटर' बनकर रह गए हैं। ई पंजाब, आई.एच.आर.एम.एस., पंजाब एजुकेयर और अन्य अनेक ऐप के साथ-साथ रोजाना आने वाली गूगल शीट के कारण अध्यापक क्लास में पढ़ाने की बजाय मोबाइल स्क्रीन पर डाटा भरने को मजबूर हैं। पुराने पोर्टल पर काम करना आसान था और अध्यापक उसमें माहिर हो चुके थे लेकिन नए पोर्टल ने विद्यार्थियों के दाखिला नंबर तक बदल दिए हैं। इस तकनीकी उलझन की वजह से पहली, छठी, 9वीं और 11वीं के नए दाखिलों की एंट्री नहीं हो पा रही है, जिससे कागजी काम का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

तकनीक के नाम पर बढ़ रही अध्यापकों की मानसिक उलझन
विशेषज्ञों और अध्यापकों का मानना है कि तकनीक का प्रयोग पढ़ाई को सुगम बनाने के लिए होना चाहिए, न कि बाधा डालने के लिए। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनैट की धीमी गति और नेटवर्क की समस्या के कारण ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करना एक जंग जीतने जैसा हो गया है। घंटों मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठने से अध्यापकों का कीमती समय बर्बाद हो रहा है जिसका सीधा नुकसान विद्यार्थियों की शिक्षा को हो रहा है। अध्यापकों ने मांग की है कि विभाग नित नए तकनीकी तजुर्बे बंद करे और हर स्कूल में डाटा एंट्री ऑपरेटर की पक्की व्यवस्था करे ताकि अध्यापक अपना पूरा ध्यान केवल विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा देने पर लगा सकें।

पुराना पोर्टल ही सही
अध्यापकों की माने तो पुराने पोर्टल में किसी भी प्रकार की कोई खामी नहीं है, सब कुछ बड़े अच्छी तरह से चल रहा था, पोर्टल को बदलने का फैसला किसी भी पक्ष से सही नहीं है, पुराने पोर्टल पर सारा डाटा उपलब्ध है, इस लिए जहाँ जरूरत हो वहां पुराने ही पोर्टल को अपग्रेड करते हुए उसे ही चालू रखना चाहिए, नया पोर्टल अध्यापकों के लिए एक समस्या मात्र है, और इस से उन्हें निजात मिलना चाहिए नहीं तो बच्चों की पढ़ाई का कीमती समय यह पोर्टल ही ले लेगा।


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Vatika

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