Viral Fever को हल्के में न लें! Punjab में बढ़े खांसी-बुखार के मरीज, रहे सावधान

punjabkesari.in Tuesday, Aug 25, 2026 - 04:55 PM (IST)

जालंधर: पंजाब समेत उत्तर भारत में इन दिनों वायरल एवं फ्लू जैसे संक्रमण के मामले बढ़ने के बीच चिकित्सकों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। दिल्ली में इन्फ्लुएंजा/एच-1एन1 में तेजी की रिपोर्टों के बीच पंजाब में वायरल बुखार, खांसी, गले में दर्द और सांस संबंधी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या बढ़ने की बात सामने आ रही है। यद्यपि दिल्ली वाला वायरल संक्रमण पंजाब में नहीं आया है परंतु फिर भी चिकित्सक वायरल बुखार पर भी पैनी नजर रख कर चल रहे हैं।

एच-1एन1 कोई नया वायरस नहीं
 
विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान एच-1एन1 पीडीएम09 वर्ष 2009 में सामने आए महामारी वाले वायरस से विकसित हुआ मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस है। वायरस में समय के साथ छोटे-छोटे आनुवंशिक बदलाव यानी एंटीजनिक ड्रिफ्ट होते रहते हैं, जिसके कारण दोबारा संक्रमण संभव है। मौजूदा फ्लू वृद्धि को अपने आप में किसी नए महामारी वाले वायरस या एंटीजनिक शिफ्ट का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।

वायरल बुखार का हाई रिस्क रोगियों पर विशेष असर
विशेषज्ञों ने कहा कि बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, स्वास्थ्य कर्मियों तथा मधुमेह, हृदय रोग, किडनी रोग, सी.ओ.पी.डी./अस्थमा, मोटापे और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि गंभीर मरीज में केवल पी.सी.आर. रिपोर्ट का इंतजार करते हुए एंटीवायरल उपचार में अनावश्यक देरी नहीं करनी चाहिए। ओसेल्टामिविर का सबसे अधिक लाभ शुरुआत में मिलता है, लेकिन गंभीर, अस्पताल में भर्ती या हाई-रिस्क मरीजों में 48 घंटे बीत जाने के बाद भी डॉक्टर की सलाह पर उपचार शुरू किया जा सकता है।

 


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Vatika

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