ट्रांसपोर्ट विभाग की फैंसी नंबर पॉलिसी पर उठे सवाल, वाहन मालिकों में बढ़ा असंतोष
punjabkesari.in Tuesday, Jun 30, 2026 - 12:45 PM (IST)
जालंधर (धवन): पंजाब ट्रांसपोर्ट विभाग की फैंसी (वी.आई.पी.) नंबर आबंटन व्यवस्था को लेकर वाहन मालिकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। ई-ऑक्शन के माध्यम से अपनी पसंद का नंबर हासिल करने वाले कई आवेदकों ने विभाग की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार से नीति में बदलाव की मांग की है।
उनका कहना है कि लाखों रुपए तक की बोली लगाकर नंबर प्राप्त करने के बावजूद यदि निर्धारित समय के भीतर वाहन की रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट (आर.सी.) स्वीकृत नहीं हो पाती या संबंधित आर.टी.ओ. कार्यालय द्वारा रोड टैक्स की रसीद के साथ नंबर को समय पर ऑनलाइन अटैच नहीं किया जाता तो वही नंबर दोबारा ई-ऑक्शन में डाल दिया जाता है।
वाहन मालिकों का कहना है कि कई बार आर.सी. की स्वीकृति या ऑनलाइन प्रक्रिया में देरी उनकी गलती नहीं होती, बल्कि तकनीकी कारणों या कार्यालयी प्रक्रियाओं के चलते ऐसा होता है। इसके बावजूद पहले से आबंटित नंबर को निरस्त कर पुन: नीलामी के लिए उपलब्ध कराना उनके साथ अन्याय है। उनका सवाल है कि जब किसी व्यक्ति ने पूरी तरह वैध प्रक्रिया के तहत बोली जीतकर नंबर प्राप्त कर लिया है और उसकी निर्धारित राशि भी जमा कर दी है, तो केवल समय-सीमा पूरी होने के आधार पर उसी नंबर को दोबारा नीलामी में डालना किस हद तक उचित है।
आवेदकों ने यह भी मांग उठाई है कि यदि किसी कारणवश विभाग उस नंबर की दोबारा ई-ऑक्शन करता है, तो पहले आवेदक द्वारा जमा कराई गई पूरी बोली राशि वापस करने की स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए। उनका कहना है कि यह राशि उनकी मेहनत की कमाई होती है और बिना किसी गलती के उसका नुकसान उठाना उचित नहीं माना जा सकता।
वाहन मालिकों के अनुसार वर्तमान व्यवस्था में समय-सीमा को लेकर स्पष्टता की कमी भी है। कई लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि किस अवधि के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी करनी अनिवार्य हैं, जिसके कारण बाद में उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उनका कहना है कि विभाग को इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिएं और आवेदकों को समय-समय पर एस.एम.एस. या अन्य माध्यमों से भी सूचित किया जाना चाहिए।
लोगों ने पंजाब सरकार और ट्रांसपोर्ट विभाग से आग्रह किया है कि फैंसी नंबर आबंटन की मौजूदा नीति की समीक्षा कर इसे अधिक व्यावहारिक और नागरिक हितैषी बनाया जाए। उनका कहना है कि यदि देरी प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से होती है तो आवेदक को अतिरिक्त समय देने या उसकी जमा राशि सुरक्षित रखने जैसी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
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