लखीमपुर खीरी के जरिए सत्ता में आने का सपना देख रहे सिद्धू, अपना रहे कैप्टन की नीति

10/8/2021 12:59:05 PM

चंडीगढ़ (हरीश) : दिसंबर 2015 में पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष बनने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बठिंडा में पार्टी की बागडोर संभालने के बाद जिस तरह भावुक होकर मंच से जिक्र किया किया था, उसके चलते पंजाब लोगों ने उन्हें राज्य सत्ता की चाबी सौंप दी थी। अमरिंदर ने 2017 में बरगाड़ी के जरिए पंजाब में सत्ता की राह पकड़ी थी। उसी तरह अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू भी 2022 में लखीमपुर खीरी के जरिए सत्ता में आने का सपना देख रहे हैं। लखीमपुर खीरी में हुई हिंसक घटना के 5 दिनों बाद सिद्धू भारी लाम-लश्कर लेकर पंजाब से घटना स्थान के लिए रवाना हुए, जिसमें पीड़ित किसान परिवारों को मिल कर उनका दुख बांट सके।

इससे पहले प्रियंका गांधी ने करीब 2 दिन की पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद अपने भाई राहुल गांधी के साथ किसानों से मुलाकात की थी। इतना ही नहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी भी सिद्धू के खिलाफ पूरे मामले में एक साबित हुए, जिसे राहुल गांधी बुधवार को लखीमपुर ले गए थे। सिद्धू के नजदीकी कैबिनेट मंत्री प्रगट सिंह का दावा है कि सिद्धू 1000 गाड़ियों का काफिला लेकर लखीमपुर खीरी के लिए रवाना हुए हैं। इस घटना के माध्यम से सिद्धू अच्छा शक्ति प्रदर्शन करने में सफल रहे हैं, जिससे उनकी पार्टी की विश्वसनीयता बहाल करने में भी मदद मिलेगी। 

केवल रजिया सुल्ताना ने उनके समर्थन में मंत्रालय से इस्तीफा दिया है, जबकि कोई अन्य विधायक या मंत्री उनके साथ नहीं गया है। कई सीनियर पार्टी नेताओं ने विधानसभा चुनाव से महज 5-6 महीने पहले उनके इस्तीफे पर नेताओं ने नाराजगी जताई थी। चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार बनने के महज 8 दिन बाद सिद्धू ने सरकार के फैसलों पर सवाल उठाते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को असहज कर दिया था।

सिद्धू को पंजाब प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिए 10 दिन हो चुके हैं और पार्टी हाईकमान ने उन्हें मनाने की कोशिश तक नहीं की है। हालांकि, हरीश चौधरी को भेजकर सिद्धू ने मुख्यमंत्री चन्नी के साथ एक बैठक की व्यवस्था की ताकि दोनों मिलकर मामले को सुलझाने का काम कर सकें। हाईकमान अचानक हट गया तो नवजोत सिद्धू का लहजा भी बदल गया। पिछले 5-6 दिनों से वह एक के बाद एक ट्वीट कर प्रियंका और राहुल गांधी का दिल जीतने की कोशिश कर रहे हैं। एक के बाद एक कई ट्वीट करने के बावजूद सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष का पद देने वाली प्रियंका और राहुल गांधी की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

लखीमपुर खीरी के लिए मार्च निकालकर सिद्धू ने अपनी राजनीति को एक नया जीवन देना शुरू कर दिया है। यह उन्हें संगठन में अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन करने में भी सक्षम बनाएगा। अगर उनका यह दाव ठीक साबित हुआ तो इससे उन्हें मुख्यमंत्री चन्नी को चुनौती देने में भी मदद मिलेगी। पंजाब पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भले ही सिद्धू के जाल में फंसकर पद से इस्तीफा देने को मजबूर हो गए, लेकिन चन्नी ने सिद्धू को पहले दिन से ही अपने पैरों पर खड़ा नहीं होने दिया। सिद्धू के इस्तीफे के दबाव के बावजूद चन्नी ने अपना फैसला नहीं बदला है। चन्नी अपनी सरकार में नवजोत सिद्धू के दखल को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं। इस बीच चन्नी के सिर पर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का आशीर्वाद है।

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Content Writer

Sunita sarangal

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