पंजाब वालों के लिए खतरे की घंटी! बाढ़ का सताया डर, खड़ी हो सकती है बड़ी मुसीबत
punjabkesari.in Monday, Jun 01, 2026 - 01:13 PM (IST)
हाजीपुर (जोशी): पिछले कुछ दिनों में हुई भारी बारिश ने जहां आम लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है, वहीं यह बारिश किसानों के लिए धान की बुआई में जरूर मददगार साबित हो रही है। मौसम में इस बदलाव ने साफ इशारा दिया है कि बारिश शुरू होने में बस कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन इस राहत के साथ ही ब्यास नदी के किनारे बसे गांवों और इलाकों के लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखने लगी हैं। इलाके के लोगों के मन में सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर इस साल भी उम्मीद से ज़्यादा बारिश हुई तो उनका क्या होगा।
गौरतलब है कि पिछले साल हिमाचल प्रदेश में रिकॉर्ड तोड़ भारी बारिश और बाढ़ की वजह से पंजाब के कई जिलों में भारी तबाही हुई थी, जिससे लोगों को करोड़ों रुपये का आर्थिक और जान का नुकसान हुआ था। ब्यास नदी के पास के इलाकों में सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ था। स्थानीय लोगों ने गहरी चिंता जताई है और सरकार की परफॉर्मेंस पर कई बड़े सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि पिछले साल आई बाढ़ के दौरान पंजाब सरकार और केंद्र सरकार ने राहत के बड़े-बड़े दावे और वादे किए थे, लेकिन बाढ़ पीड़ितों को ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस मदद नहीं मिली। लोगों के मुताबिक, सरकारों की तरफ से दी गई मामूली मदद उनके हुए बड़े नुकसान के मुकाबले एक क्रूर मजाक जैसी थी।
इस बारे में बात करते हुए स्थानीय निवासियों और ज़िला किसान कांग्रेस सेल के अध्यक्ष अमरजीत सिंह धाड़ेकटवाल, ज़िला परिषद के पूर्व सदस्य सुमित डडवाल, गुरु नानक सेवा सोसाइटी के अध्यक्ष किरपाल सिंह गेरा और लखविंदर सिंह टिम्मी ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए तीखे सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि पिछली बाढ़ को एक साल बीत जाने के बाद भी नदी के किनारों (खोदे गए किनारों) को मज़बूत करने और बाढ़ को रोकने के लिए क्या ठोस इंतज़ाम किए गए हैं। क्या प्रशासन इस बार भी कागज के दावों तक ही सीमित है या लोगों को एक बार फिर बाढ़ की मार झेलने के लिए भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है?
बारिश का मौसम नजदीक आने के साथ ही लोग अब सरकार और संबंधित विभागों से तुरंत कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। नदियों के कमज़ोर तटबंधों की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर पूरा किया जाना चाहिए ताकि पिछले साल जैसी भयानक स्थिति फिर से पैदा न हो और सीमावर्ती इलाकों के लोग बिना किसी डर के अपने घरों में रह सकें।
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