लम्बी ड्यूटी के कारण ट्रैफिक पुलिस ज्वाइन नहीं करना चाहते युवा मुलाजिम

12/8/2019 10:21:11 AM

जालंधर(वरुण): ट्रैफिक पुलिस में लम्बी ड्यूटी के कारण युवा ट्रैफिक पुलिस ज्वाइन करने में कतरा रहे हैं। सड़कों पर आम देखी जाने वाली ट्रैफिक पुलिस में मात्र 2 से 3 मुलाजिम ही युवा हैं जबकि बाकी के सभी मुलाजिम पुराने हैं। 

2017 में जालंधर ट्रैफिक पुलिस में 250 के करीब मुलाजिम हुआ करते थे। हालांकि जालंधर में वाहनों की गिनती व आबादी के आंकड़े देखे जाएं तो 250 मुलाजिम भी कम थे, लेकिन दिसम्बर-2019 में ट्रैफिक पुलिस में मात्र 150 मुलाजिम ही रह चुके हैं। ट्रैफिक पुलिस कर्मचारियों के रिटायर्ड होने के बावजूद भर्ती नहीं हुई। ट्रैफिक में सख्त व लंबी ड्यूटी के कारण युवा मुलाजिम पुलिस विभाग के अलग-अलग दफ्तरों, पी.सी.आर. या फिर थानों को पसंद कर रहे हैं लेकिन ट्रैफिक पुलिस में 3 युवा मुलाजिमों को छोड़ कर कोई भी युवा मुलाजिम आने को तैयार नहीं। 

करीब 8 माह पहले ट्रैफिक पुलिस के पूर्व ए.सी.पी. जंग बहादुर शर्मा ने ट्रैफिक पुलिस में 30 लेडी पुलिस कर्मियों को ट्रेनिंग देकर भर्ती किया था लेकिन लम्बी ड्यूटी होने के कारण 22 के करीब महिला मुलाजिमों ने ट्रैफिक पुलिस में से ट्रांसफर करवा लिए और अलग-अलग विभागों व थानों में तैनात हो गई। ट्रैफिक पुलिस के पूर्व ए.डी.सी.पी. अश्विनी कुमार ने तब कहा था कि उक्त मुलाजिमों को दोबारा ट्रैफिक पुलिस में लाया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अब ट्रैफिक पुलिस में महिला मुलाजिमों को गिनती 8 ही रह चुकी है। 

ट्रैफिक पुलिस के पास मात्र 3 सरकारी गाड़ियां, निजी गाड़ियों का करता है इस्तेमाल
150 की गिनती में सिमटी ट्रैफिक पुलिस के पास मात्र 3 ही सरकारी गाड़ियां हैं। 3 गाड़ियों में से 2 ट्वेरा व एक मारुति वैन हैं। 2 गाड़ियां इंस्पैक्टर रैंक के अधिकारियों व एक गाड़ी ए.एस.आई. के पास रहती है।
हालांकि अगर किसी को अन्य गाड़ी का इस्तेमाल करना पड़े तो उसे खुद की गाड़ी लानी पड़ती है। स्पीडो मीटर का नाका लगाने पर भी मुलाजिमों को निजी गाड़ी का इस्तेमाल करना पड़ता है। हालांकि कम गाड़ियों के बारे जब ए.सी.पी. ट्रैफिक हरबिन्द्र भल्ला से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पिछले साल 10 सरकारी गाड़ियों की मांग की गई थी लेकिन अभी तक नहीं मिली। 

मुलाजिमों की कम नफरी के कारण भी ट्रैफिक समस्या बढ़ रही 
ट्रैफिक पुलिस में इस समय 5 इंस्पैक्टर, 4 सब-इंस्पैक्टर, 35 ए.एस.आई. मिला कर कुल 150 मुलाजिम हैं, इनमें से 8 से 10 मुलाजिम ऑफिस के कामों के लिए हैं और बाकी के फील्ड में रहते हैं। अगर आसपास के जिलों में वी.वी.आई.पी. रूट दौरान ट्रैफिक पुलिस की डिमांड होती हैं तो 150 मुलाजिमों में से भी मुलाजिमों को बाहरी जिलों में वी.वी.आई.पी. रूट पर भेज दिया जाता हैं। ट्रैफिक पुलिस की कम नफरी के कारण भी ट्रैफिक समस्या बढ़ी हुई है। 

डी.सी.पी. ट्रैफिक नरेश डोगरा का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस में भर्ती के लिए कोशिशें की जा रही हैं। जल्द ही नया स्टाफ रखा जाएगा। ट्रैफिक पुलिस में कम नफरी के कारण ही मुलाजिमों को ज्यादा ड्यूटी देनी पड़ रही है लेकिन मुलाजिमों को परेशानियों का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है। 


Edited By

Sunita sarangal

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