पाकिस्तान से आए 93 हिंदू वापिस नहीं जाना चाहते, खुफिया एजेंसियां ​​जांच में जुटी

punjabkesari.in Wednesday, Oct 19, 2022 - 12:56 PM (IST)

जालंधर/पाकिस्तान: पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आए हिंदुओं के 2 जत्थे में शामिल 93 लोग अब वापिस नहीं जाना चाहते। इन लोगों ने भारत में बसने की इच्छा जताई है और कहा है कि वे वापिस नहीं जाना चाहते। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि उत्तर पश्चिम रेलवे (एन.डब्ल्यू.आर.) के अधिकारियों और राज्य की खुफिया एजेंसियों ने इन जत्थों में आए लोगों के ठिकाने का पता लगाने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है, जो अब जोधपुर के बाहरी इलाके डालीबाई चौराहा नजदीक पहले से ही बेघर लोगों द्वारा अवैध रूप से कब्जा की गई गई झुग्गी इलाके में बसने की कोशिश कर रहा था।  

भील समुदाय के हैं हिंदू

50 हिंदुओं का पहला जत्था 12 अक्तूबर को हरिद्वार से ट्रेन से जोधपुर पहुंचा, जबकि बच्चों समेत 43 लोगों का दूसरा जत्था 14 अक्तूबर को जोधपुर रेलवे स्टेशन पहुंचा। ये लोग भारत पहुंचे और पाकिस्तान में अचानक आई बाढ़ के बाद राहत कार्यों में उत्पीड़न और भेदभाव का आरोप लगाया। ये लोग भील समुदाय के हैं और सिंध के टांडो अल्लाहयार जिले से आए हैं। अप्रवासी वीजे की जी.आर.पी.-जोधपुर और खुफिया विभाग के अधिकारी यह पता  करने के लिए जांच कर रहे हैं कि ये तीर्थयात्रा वीजा हैं या सैर-सपाटा वीजा और क्या वे कानूनी अप्रवासियों की योग्यता के मापदंडों को पूरा करते हैं।

लंबे समय के वीजे की होगी जांच 

सूत्रों ने बताया है कि विस्थापितों के ओवरस्टे या लंबी अवधि के वीजा की जांच की जाएगी और खुफिया विभाग की स्थिति रिपोर्ट पर जिला कलेक्टर द्वारा उचित कार्रवाई की जाएगी। इन प्रवासियों को 2016 के विस्थापन दिशा-निर्देशों और इमीग्रेशन या रिहायशी नियमों का पालन करने के लिए अप्रवासियों को देश छोड़ने के लिए कहा जाएगा।

सीमांत लोक संगठन के प्रमुख हिंदू सिंह सोढा ने कहा कि इन लोगों के पास अपने देश में हो रहे उत्पीड़न और भेदभाव को देखते हुए कोई दूसरा विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा कि वह भारत को अपना प्राकृतिक घर मानते हैं। सिंह ने कहा कि वे तीर्थयात्रा वीजे पर हरिद्वार आए थे, जहां एजेंसियों ने उनके आगमन को पंजीकृत किया और फिर अपने अंतिम गंतव्य के लिए रवाना हो गए। उनके पास यहां बसने के लिए वीजा नहीं है। इस बीच, पुलिस अधिकारियों ने प्रवासियों के दस्तावेजों की जांच के लिए टीमें भेजी हैं। ए.एस.पी. (सी.आई.डी.) रामेश्वर लाल मेघवाल ने कहा कि जो उचित होगा वह करेंगे। अगर वे वापिस नहीं जाना चाहते हैं, तो उन्हें यहां रहने के लिए औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कहा जाएगा।

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News Editor

Urmila

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