अमृतसर के पॉश इलाकों में लोगों की सेहत से खिलवाड़! स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल
punjabkesari.in Monday, Jul 27, 2026 - 12:23 PM (IST)
अमृतसर (दलजीत): शहर के सबसे पॉश इलाकों में शामिल रणजीत एवेन्यू, लॉरैंस रोड और मजीठा रोड जैसे क्षेत्रों में मिलावटखोरी और गैर-कानूनी खाद्य पदार्थों का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है जबकि स्वास्थ्य विभाग आंखें मूंद कर बैठा है। यहां पर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के नियमों को नजरअंदाज करते हुए खाने-पीने की वस्तुएं बेची जा रही हैं जो लोगों की सेहत से खिलवाड़ है। इन इलाकों में सैंकड़ों की संख्या में रेहड़ियां, छोटी दुकानें और होटल बिना किसी लाइसैंस या रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं। फूड सेफ्टी के तहत अनिवार्य नियमों का पालन करना तो दूर, बहुत-सी जगहों पर खाद्य पदार्थ गंदगी भरे और अस्वास्थ्यकर हालातों में तैयार किए जा रहे हैं। ये हालात स्वास्थ्य विभाग की नाकामयाबी को सीधा बयां करते हैं।
रणजीत एवेन्यू में हर रोज लगने वाली रेहड़ी मार्कीट इस समस्या का सबसे बड़ा केंद्र बन चुकी है। यहां बड़ी संख्या में व्यापारी बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के खाने-पीने की चीजें बेच रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि न तो इनके पास फूड लाइसैंस है और न ही खाद्य पदार्थ बनाने वालों के मैडीकल टैस्ट करवाए गए हैं। ग्राहकों को क्या खिलाया जा रहा है, इसकी कोई जांच नहीं हो रही।
खाद्य पदार्थ बनाने वालों के पास दिखाई देते हैं चूहे
लॉरैंस रोड पर खाद्य पदार्थ बनाकर बेचने वालों के पास मोटे-मोटे चूहे खुलेआम भागते नजर आते हैं और सफाई का कोई नामो-निशान नहीं है। गंदे पानी, खुले कूड़े और अस्वच्छ स्थानों में खाना तैयार किया जा रहा है। यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि लोगों की सेहत से खिलवाड़ है।
विभाग के दावे जमीनी हकीकत से दूर
हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर मिलावटखोरी के खिलाफ अभियानों के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। विभागीय कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है। अधिकारियों द्वारा चैकिंग के नाम पर रस्मी कार्रवाई करके वाह-वाही तो लूट ली जाती है लेकिन असल समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है।
फूड सेफ्टी अफसर मिलावटखोरी रोकने में असफल
पिछले काफी समय से इस क्षेत्र में तैनात फूड सेफ्टी अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि लंबे समय से एक ही जगह पर तैनात होने के बावजूद मिलावटखोरी पर काबू पाने के लिए कोई उचित कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या यह लापरवाही है या फिर किसी तरह की मिलीभगत? इस संबंध में जब फूड सेफ्टी अफसर से संपर्क करना चाहा, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
नव-नियुक्त डी.एच.ओ. से लोगों को उम्मीदें
लोगों को अब नव-नियुक्त जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनजीत सिंह रटौल से उम्मीदें जुड़ गई हैं। लोगों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि क्या वह सोए हुए फूड विंग को जगाकर जमीनी स्तर पर कड़ी कार्रवाई करवाएंगे या फिर यह मामला भी पहले की तरह कागजों में ही दबकर रह जाएगा।
क्या खत्म हो गया है कानून का डर?
यदि जल्द ही उचित कदम न उठाए गए तो इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ेगा और आने वाले समय में बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। शहर के पॉश इलाकों में इस तरह की लापरवाही न सिर्फ प्रशासन पर सवाल खड़े करती है बल्कि यह दर्शाती है कि कानून का डर खत्म हो चुका है। अमृतसर में मिलावटखोरी का यह बढ़ता जाल अब एक बड़ी चेतावनी है, यदि अब भी सख्त कदम न उठाए गए तो लोगों की सेहत की कीमत पर यह धंधा और फैलता ही जाएगा।
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