जालंधर कैंटोनमैंट बोर्ड के खिलाफ व्यापारियों और आम जनता में भारी रोष, दी चेतावनी
punjabkesari.in Monday, Jan 19, 2026 - 11:28 AM (IST)
जालंधर छावनी (दुग्गल): जालंधर कैंटोनमैंट बोर्ड द्वारा घरों तथा दुकानों पर लगाए जा रहे भारी-भरकम टैक्स को लेकर इलाके के व्यापारियों और आम जनता में भारी रोष देखने को मिल रहा है। लोगों का आरोप है कि बोर्ड ने जनता को बिना सूचना दिए टैक्स लागू करने का फैसला लिया जिसकी जितनी निंदा की जाए उतनी कम है। इस संदर्भ में कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की।
कैंटोनमैंट बोर्ड के पूर्व वाइस प्रैजीडैंट राम अवतार अग्रवाल ने कहा कि वर्ष 2015 में कैंटोनमैंट बोर्ड ने घरों और दुकानों के टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उस समय जनता के कड़े विरोध के चलते यह प्रस्ताव वापस लेना पड़ा था। वहीं तत्कालीन सी.ई.ओ. मीनाक्षी लोहिया के कार्यकाल में केवल घरों पर ही मामूली सा टैक्स लगाया गया था परंतु वर्ष 2024 में फिर से एक बार फिर से टैक्स बढ़ाने को लेकर नोटिस प्रकाशित करवाया और लोगों से आपत्तियां मांगी गईं।
अग्रवाल ने कहा कि पब्लिक सूचना में किस पर कितना टैक्स लगाया जाएगा इस संबंध में पब्लिक नोटिस में कोई जिक्कर नहीं था इसलिए लोग आपत्तियां नहीं दे पाए। समाज सेवक तथा आर.टी.आई. एक्टिविट ओम प्रकाश शर्मा ने कहा कि कैंटोनमैंट बोर्ड ने सार्वजनिक स्थानों पर नोटिस बोर्ड नहीं लगाया, जिससे अधिकांश लोगों को इस की जानकारी ही नहीं मिल सकी। इसी का फायदा उठाकर अब घरों व दुकानदार मालिकों पर हर महीने भारी टैक्स लगाया जा रहा है। यह टैक्स आम जनता की आमदनी पर सीधा असर डाल रहा है और छोटे दुकानदारों के लिए व्यापार चलाना मुश्किल हो जाएगा।
बिजली के व्यापार से जुड़े अमृतपाल सिंह लवली ने कहा कि यदि कैंटोनमैंट बोर्ड ने समय रहते सही तरीके से सूचना दी होती तो जनता अपनी आपत्तियां दर्ज कर सकती थी। अब जिस तरह भारी टैक्स लगाने की तैयारी की जा रही है जिसे कतई भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लवली ने कहा कि जनता के ऊपर पहले से ही कई तरह के टैक्स थोपे गए हैं। उल्लेखनीय है कि बोर्ड द्वारा भारी टैक्स लगाने को लेकर कैंट के हर चौराहों पर आम जनता द्वारा नुक्कड़ मीटिंगें की जा रही है और जनता ने एकजुट होकर इस फैसले का विरोध करने की तैयारी शुरू कर दी है और प्रशासन से टैक्स वापस लेने की मांग की है। वहीं व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस टैक्स को वापस नहीं लिया गया तो वे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे। जब इस संबंध में बोर्ड के एक उच्च अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि लोगों की आपत्तियां लेने के लिए जगह-जगह पर नोटिस लगाए गए थे।
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