पंजाब पुलिस अकैडमी ड्रग रैकेट मामले में आया नया मोड़, हो सकती है CBI जांच

punjabkesari.in Saturday, May 28, 2022 - 10:46 AM (IST)

फिल्लौर (भाखड़ी): पुलिस अकैडमी में चल रहे नशे के ड्रग रैकेट का पर्दाफाश होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में बीते दिन पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में एक रिट पटीशन दायर की गई जिसके बाद अकैडमी से लेकर पूरी पंजाब पुलिस प्रशासन में हंगामा मच गया है। रिट पटीशन दायर करने वाले शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की सी.बी.आई. जांच करवाने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि पुलिस ने जिन 7 मुलजिम पुलिस मुलाजिमों को गिरफ्तार किया है, वह तो सिर्फ सामने हैं, पीछे बैठे बड़े आका जो चाल चल रहे थे, उनको जब तक बेनकाब नहीं किया जाता उस समय तक पुलिस अकैडमी में सुधार आना असंभव है।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में रिट दायर करके शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह के किले में चल रही पंजाब पुलिस अकैडमी फिल्लौर का पूरे देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी नाम है। जहां छोटे पुलिस मुलाजिमों से लेकर बड़े आधिकारियों को देश की सेवा करने का प्रशिक्षण दिया जाती है। उस अकैडमी में पिछले 3-4 वर्षों से तैनात पुलिस मुलाजिम न सिर्फ सरेआम चिट्टे का प्रयोग कर रहे थे बल्कि कुछ पुलिस मुलाजिम नशों की समगलिंग करके रुपए भी कमा रहे थे।

पत्रकारों की तरफ से मामले का पर्दाफाश करने के बाद प्रशासन हरकत में आया और जांच टीमें बिठाई गई, जिसके बाद 7 पुलिस मुलाजिमों को नशा करने और समगलिंग के दोष में गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। उक्त मामले को दबाने में किले की पुलिस ही नहीं बल्कि बाहर की पुलिस ने भी पूरा योगदान दिया। न तो पकड़े गए मुलजिमों के बैंक खाते चैक किए गए कि उनके खातों में ट्रांजेक्शन कैसे हो रही थी और न ही उनके पास से कोई बड़ी रिकवरी दिखाई गई। उनको यह भी नहीं पूछा गया कि उनकी पीठ पर अकैडमी के किस बड़े अधिकारी का हाथ था जिसके साथ वह अब तक बचते आए हैं। इन सब कारणों करके सी.बी.आई. जांच की मांग उठी है। अदालत ने डी.जी.पी. पंजाब पुलिस और गृह विभाग के सचिव को एफीडेविट जमा करवाने के आदेश जारी किए हैं।

पर्दा डालता रहा पुलिस प्रशासन
पूरे मामले से पर्दा उस समय पर उठा जब एक हवलदार हरमन बाजवा की तबीयत खराब हो गई जिसको अस्पताल दाखिल करवाया गया। हालांकि अधिकारी मीडिया को उसके बीमार होने बारे बताते रहे परन्तु अस्पताल के डाक्टरों ने स्पष्ट कह दिया कि चिट्टे का नशा करने कारण उसके शरीर की नसें खत्म हो चुकी हैं। आखिर में हवलदार की मौत हो गई। जो अधिकारी घटना पर पर्दा डाल रहे थे उनकी भी किरकिरी हुई।

गवाह को ही भेज दिया जिला
पूरी घटना पर जांच टीम बिठाई गई तो एक सिपाही रमन‌ ने जांच टीम आगे पेश होकर बताया कि अकैडमी अंदर बहुत बड़े स्तर पर नशो का रैकेट चल रहा है। यह रैकेट पुलिस मुलाजिम चला रहे हैं। उसने बताया कि वह भी इस रैकेट का शिकार हो चुका है और उसका कण-कण कर्जे के बोझ नीचे दब चुका है। उसने बताया कि 10 मुलाजिम अन्य हैं जो इस नशे के जाल में फंसे हुए हैं। उसे तरस के आधार पर भर्ती किया गया है। अधिकारी अगर उसका इलाज करवा देते हैं और उसे नौकरी से निकालते नहीं तो वह अकैडमी अंदर चल रहे रैकेट का पूरी तरह पर्दाफाश कर सकता है। उसके बयानों पर जांच आगे बढ़ी तो 7 मुलजिम पुलिस मुलाजिमों को गिरफ्तार करने में पुलिस ने सफलता हासिल कर ली। इससे पहले कि पकड़े गए पुलिस मुलाजिम और गवाह बनने वाला रमन‌ कुमार किसी बड़े अधिकारी का नाम लेता, पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार करके जेल में फैंक दिया। स्थानीय पुलिस ने यह सब कुछ दबाव नीचे आकर किया। उसके जेल जाने साथ सभी राज वहीं दफन होकर रह गए। अब हर किसी की नजरें सी.बी.आई. जांच पर टिकी हुई हैं।

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News Editor

Urmila

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