प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों को ''मलाईदार सीटों'' का चस्का, बार-बार करवाते हैं लुधियाना में पोस्टिंग
punjabkesari.in Monday, Feb 16, 2026 - 10:06 AM (IST)
लुधियाना (राम): पंजाब की औद्योगिक राजधानी लुधियाना में प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था खुद गंभीर सवालों के घेरे में आ चुकी है। जिस विभाग पर शहर की हवा, पानी और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है, उसी विभाग के कुछ अधिकारी और मुलाजिमों पर सिस्टम को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने के आरोप लग रहे हैं। पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड में लंबे समय से यह चर्चा है कि जो अधिकारी एक बार लुधियाना में तैनात रह चुके हैं, वे दोबारा यहीं लौटने की ताक में रहते हैं और लौटते भी हैं तो सीधे प्रभावशाली और मलाईदार सीटों पर।
सूत्रों के मुताबिक लुधियाना में तैनाती को पीपीसीबी के अंदर सबसे अहम पोस्टिंग माना जाता है। औद्योगिक गतिविधियों की भरमार, निरीक्षण और कार्रवाई की व्यापक शक्तियों के कारण यहां का दफ्तर प्रभावशाली माना जाता है। आरोप हैं कि जो अधिकारी एक बार यहां तैनात रह चुके हैं, वे दोबारा इसी दफ्तर में लौटने की कोशिश करते हैं और जब लौटते भी हैं, तो महत्वपूर्ण सीटों पर ही आते हैं।
लुधियाना दफ्तर की जमीनी हकीकत यह बताती है कि जो अधिकारी और मुलाजिम आपस में तालमेल बनाकर चलते हैं, वही महत्वपूर्ण सीटों पर टिके रहते हैं। फाइलें उन्हीं के जरिए आगे बढ़ती हैं और निर्णय भी उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमते हैं और जो गड़बड़ियों से दूरी बनाए रखते हैं या सवाल उठाने की हिम्मत करते हैं, उन्हें तबादलों का सामना करना पड़ता है। इससे न सिर्फ कर्मचारियों का मनोबल गिरता है, बल्कि पूरा सिस्टम भी कमजोर हो रहा है। लुधियाना की इंडस्ट्री पहले से ही कई चुनौतियों से जूझ रही है। कभी सख्त कार्रवाई, कभी ढील तो कभी बिना बात के नोटिस से उद्योगपति परेशान हैं। उद्योग जगत का आरोप है कि नियम सबके लिए बराबर नहीं हैं। कुछ पर कार्रवाई होती है तो कुछ को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
अगर यही हालात रहा तो इसका सीधा असर रोजगार पर पड़ेगा। छोटे और मध्यम उद्योग पहले ही सीमित संसाधनों में काम कर रहे हैं। लगातार अनिश्चित माहौल उन्हें निवेश घटाने या दूसरी राज्यों की ओर रुख करने के लिए मजबूर कर रहा है। इसका नुकसान केवल उद्योगपतियों को नहीं, बल्कि हजारों कामगारों और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी होगा।
पीपीसीबी के मेंबर सेक्रेटरी और अध्यक्ष के लिए यह स्थिति गंभीर चेतावनी है। केवल आदेश जारी करने से काम नहीं चलेगा। विभाग के भीतर पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही स्थापित करना अब जरूरी हो गया है। पोस्टिंग और ट्रांसफर में स्पष्ट नीति, शिकायतों की निष्पक्ष जांच और ईमानदार कर्मचारियों को संरक्षण दिए बिना सुधार संभव नहीं।
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