‘मिशन फतेह’ को खुद मुख्यमंत्री ने ही दिखाई पीठ : बीर दविंदर

punjabkesari.in Friday, Sep 11, 2020 - 09:25 AM (IST)

पटियाला(राजेश पंजोला): पंजाब विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर और शिरोमणि अकाली दल डैमोक्रेटिक के सीनियर नेता बीर दविंदर सिंह ने कहा कि पंजाबियों को कोविड-19 से बचाने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने जो ‘मिशन फतेह’ लांच किया था, उसको खुद मुख्यमंत्री ने ही पीठ दिखा दी है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह का ‘मिशन फतेह’ पंजाबियों के साथ धोखा साबित हुआ है। मुख्यमंत्री 22 मार्च से लेकर अब तक अपने नए बनाए किले ‘सारागढ़ी फार्म’ में एकांतवास में हैं। पंजाब के लोग कैप्टन सरकार के फेल मैडीकल सिस्टम के कारण अपनी कीमती जानों से हाथ धो रहे हैं। अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्री अपनी जनता के पास जाकर उनका हालचाल पूछ रहे हैं। पंजाब के लोग इंतजार कर रहे हैं कि कब मुख्यमंत्री अस्पतालों में उनका हाल जानने आएंगे। कैप्टन ने फरमान भी जारी किया था कि प्रदेश के मंत्री, विधायक अस्पतालों में जाकर मरीजों का हालचाल पूछें, पर कैप्टन के मंत्रियों, विधायकों व चेयरमैनों ने उसका आदेश नहीं माना।  

‘मुख्यमंत्री को एक फौजी की तरह फ्रंट पर आकर लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए’
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह फौज के कैप्टन भी रहे हैं और अब भी पंजाब की अगुवाई कर रहे हैं। ऐसे में अगुवाई करने वाले का भाग कर किले में घुस जाना शोभा नहीं देता। कैप्टन अमरेंद्र को लोगों ने मुख्यमंत्री बनाया है। वह अपने पूर्वजों की तरह विरासती गद्दी संभाल के मुख्यमंत्री नहीं बने, लिहाजा उन्हें अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और एक फौजी की तरफ फ्रंट पर आकर पंजाब के लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि डाक्टर, पैरा मैडीकल स्टाफ, सफाई सेवक और अन्य कर्मचारी फ्रंट पर आ कर कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्री और विधायक भी सरकारी खजाने से वेतन ले रहे हैं। इनके वेतन व भत्ते डाक्टरों के अलावा अन्य कर्मचारियों से कहीं अधिक हैं। ऐसे में सरकार के मंत्री व विधायक लोगों की सेवा के लिए आगे क्यों नहीं आ रहे? 

‘जिस शहर ने 4 बार एम.एल.ए. बनाया अमरेंद्र उस शहर में एक बार भी नहीं गए’
सरकारी अस्पतालों में पीने का पानी तक नहीं मिल रहा। जिन लोगों पर परमात्मा की कृपा हो जाती है, वह बच जाते हैं बाकी अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह को फेसबुक पर वोटें नहीं डालीं। लोग वोटें डालने के लिए लाइनों में लगे थे। सब से दुख की बात यह है कि जिस शहर ने उन्हें चार बार एम.एल.ए. बनाया, वह उस शहर में एक बार भी नहीं आए और किसी भी कोरोना मरीज का हालचाल नहीं पूछा। कम से कम अपने हलके के सरकारी राजेन्द्रा अस्पताल में तो चक्कर लगा जाते।

कोरोना पॉजिटिव आया कोई भी मंत्री, विधायक सरकारी अस्पताल में नहीं हुआ दाखिल
बहुत दुख की बात है कि कांग्रेस पार्टी का एक भी मंत्री, विधायक कोरोना पॉजिटिव आने के बाद सरकारी अस्पताल में दाखिल नहीं हुआ, जबकि फेसबुक पर यह लोग पंजाब में सेहत सुविधाओं की बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं। पंजाब की जनता पूछना चाहती है कि क्या मुख्यमंत्री, मंत्रियों व विधायकों को पंजाब के सरकारी अस्पतालों पर विश्वास नहीं है? पंजाब के आम लोगों को सरकारी अस्पतालों में मरने के लिए क्यों छोड़ा जा रहा है? मुख्यमंत्री व उनके मंत्री एक-एक रात इन अस्पतालों में जरूर गुजार कर जाएं ताकि पंजाब के लोगों को विश्वास हो सके कि पंजाब की सेहत सुविधाएं बहुत बढिय़ा हैं।


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