दम तोड़ रहा स्मार्ट सिटी प्रोजैक्ट, विजिलेंस के हवाले की जा सकती है जांच

punjabkesari.in Saturday, Apr 16, 2022 - 03:06 PM (IST)

जालंधर (खुराना): आज से लगभग 5 वर्ष पहले जब प्रधानमंत्री नरेन्दर मोदी की तरफ से शुरू किेए गए स्मार्ट सिटी मिशन में जालंधर का नाम भी शामिल हुआ था तो लोगों ने इस बात को लेकर खुशी मनाई थी कि अब केंद्र और राज्य सरकार के सैंकड़ों करोड़ रुपए की मदद से जालंधर शहर इतना स्मार्ट हो जाएगा कि इस शहर को पहचानना मुश्किल होगा। केंद्र सरकार ने वादे मुताबिक जालंधर स्मार्ट सिटी कंपनी को सैंकड़ों करोड़ रुपए का फंड भी दिया। इसके लगभग 1000 करोड़ रुपए के काम या तो पूरे हो चुके हैं या विकास अधीन हैं या उन की डी.पी. आरज आदि फाइनल हो चुकी हैं क्योंकि जालंधर स्मार्ट सिटी कंपनी में विधायकों, मेयर, डिप्टी कमिश्नर और अन्य बड़े आधिकारियों के दखल की कोई खास गुंजाइश नहीं है इसलिए समय-समय पर जालंधर स्मार्ट सिटी के अलग-अलग प्रोजैक्टों पर घपलो के दोष लगते रहे हैं।

स्मार्ट सिटी का चौकों सम्बन्धित 20 करोड़ रुपए का प्रोजैक्ट सबसे चर्चित रहा जिसको लेकर विधायक राजिन्दर बेरी समेत कई कांग्रेसी नेताओं ने घपलो के दोष लगाए परन्तु तब विधायकों की एक न सुनी गई और उस प्रोजैकट के अंतर्गत जिस वर्कशाप चौक और कपूरथला चौक पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए उनको अब तोड़ने का काम शुरू हो गया और अब वहां स्मार्ट रोड्ज के नाम पर फिर करोड़ों रुपए लगाए जा रहे हैं। इसी तरह स्मार्ट सिटी का एल.ई.डी. स्ट्रीट लाइट प्रोजैक्ट भी तब बड़ा स्कैंडल ऐलान किया गया। जब शहर के कांग्रेसी विधायकों, मेयर और अन्य ज्यादा कौंसलरों ने इसकी खूब आलोचना की। प्रोजेक्ट के अंतर्गत बहुत देसी ढंग के साथ सिर्फ स्ट्रीट लाइटों को ही बदला गया और व्यवस्था को स्मार्ट बनाने का कोई यत्न ही नहीं किया गया।

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स्मार्ट सिटी में सकैंडल की गूंज पार्कों पर खर्च किए गए करोड़ों रुपए को लेकर भी हुई। असंख्य पार्क और निचले पार्क पर सवा-सवा करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए परन्तु वहां बहुत घटिया स्तर के काम हुए जिसको लेकर कांग्रेसी नेताओं ने कई एतराज उठाए परन्तु उन एतराजों को रद्दी की टोकरी में फैंक दिया गया। इसी तरह स्मार्ट सिटी के ठेकेदारों और अफसरों ने मिलकर बूटा मंडी के डा. अम्बेडकर पार्क और अर्बन एस्टेट फेज-2 के टंकी वाला पार्क में भी खूब गड़बड़ी की जिसको लेकर कई सवाल उठे परन्तु उन सभी सवालों की कोई परवाह नहीं की गई।

विजिलेंस जांच हुई तो स्मार्ट सिटी के अफसरों का कुछ नहीं बिगड़ेगा
सभी को पता है कि जालंधर स्मार्ट सिटी में नगर निगम जालंधर से रिटायर हो चुके ऐसे अधिकारी रखे गए हैं जिन अपनी पूरी नौकरी मलाईदार सीटों पर काबिज रह कर की और रिटायरमेंट के बाद पैंशन के साथ-साथ कांट्रेक्ट के आधार पर फिर मलाईदार नौकरी हासिल की। स्मार्ट सिटी के सकैंडलों की जांच दौरान यदि कांट्रेक्ट के आधार पर रखे गए ऐसे रिटायर्ड आधिकारियों की कोई भूमिका आती है तो विजिलेंस शायद ही इन पर कोई कार्यवाही कर सके क्योंकि यह अधिकारी सरकारी नौकर नहीं हैं और कभी भी नौकरी छोड़ कर जा सकते हैं।

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चहेते ठेकेदारों को ही टैंडर देने के दोष भी सी.एम. को लगाए
कांग्रेसियों के बाद अब सत्ता में आए आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी स्मार्ट सिटी में हुए घपलों की शिकायत सी.एम. को की है। एक शिकायत यह भी लगाई गई है कि स्मार्ट सिटी पर काबिज आधिकारियों ने तिकड़मबाज़ी लगाकर अपने चहेते ठेकेदारों को ही बड़े-बड़े टैंडर अलॉट किए और उन ठेकेदारों पर दबाव बनाया गया कि वह मटीरियल भी उन अफसरों की चहेती कंपनियों से ही खरीदें। इस मामलो में सबसे बड़ा दोष 120 फूटी रोड पर डाले गए स्टारम वाटर सीवर प्रोजैक्ट पर आ रहा है जिस पर स्मार्ट सिटी के 20 करोड़ रुपए खर्च हुए।

यह काम एक स्थानीय ठेकेदार से करवाया गया और मौजूदा विधायक शीतल अंगुराल ने इस प्रोजैक्ट में पूर्व विधायक सुशील रिंकू और एक बड़े अधिकारी की कथित हिस्सेदारी को लेकर गंभीर दोष तक पहुंचा हैं। स्मार्ट सिटी कंपनी ने नहर के सौंदर्यीकरण और पार्कों के सुधार सम्बन्धित महंगे प्रोजैक्ट भी चहेते ठेकेदारों को अलाट किए और इसके लिए स्मार्ट सिटी के टीम नेता पर दोष लगाए जा रहे हैं जिसने अपने निगम कनेक्शनों का प्रयोग किया। अब देखना है कि सी.एम. आफिस स्मार्ट सिटी के प्रोजैक्ट की जांच विजिलेंस के हवाले करते हैं या पूर्व मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह की सरकार की तरह यह शिकायतें भी चंडीगढ़ में ही दफन हो जाएंगी। 

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News Editor

Urmila

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