रिंपी अनेजा सुसाइड केस: 48 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली, पीड़ित परिवार आज निकलेगा कैंडल मार्च
punjabkesari.in Saturday, May 09, 2026 - 02:55 PM (IST)
लुधियाना (राज): प्रॉपर्टी डीलर रिंपी अनेजा सुसाइड मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। रिंपी को जान गंवाए दो दिन बीत चुके हैं, लेकिन दर्जनों रसूखदार नामजद आरोपियों में से एक भी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है। अब पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और सोए हुए प्रशासन को जगाने के लिए आज शाम 5:30 बजे शहर में एक विशाल कैंडल मार्च निकाला जाएगा।
सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर यह भी है कि इस मामले में नामजद कुछ आरोपी विदेश भाग चुके हैं, जिससे पुलिस की ढीली कार्रवाई पर चर्चा गर्म है। बता दें कि दुगरी पुलिस ने इस मामले में शहर के बड़े रसूखदारों के खिलाफ केस दर्ज किया है, जिनमें लोहा कारोबारी राजेश बंसल, शेयर कारोबारी विनोद स्याल, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के सुपरिटेंडेंट हरप्रीत सिंह, कीज होटल के मालिक पंकज गुप्ता, सम्राट फर्नीचर के खुशवंत सिंह और कॉलोनाइजर रिश्मजीत सिंह गाबा सहित कई बड़े नाम शामिल हैं।
रिंपी अनेजा के अंतिम संस्कार को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। सुसाइड से पहले बनाए गए भावुक वीडियो में रिंपी ने प्रशासन के सामने एक बड़ी शर्त रखी थी। उन्होंने मांग की थी कि उनके शरीर को अग्नि देने से पहले उनके परिवार का बनता हक इन आरोपियों से दिलाया जाए। चूंकि अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है और न ही परिवार को हक मिला है, इसलिए संस्कार को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
शुक्रवार को इस मामले में उस वक्त नया मोड़ आया जब सीआईडी की एक टीम लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के दफ्तर पहुंची। टीम ने वहां विभिन्न अधिकारियों के बैंक अकाउंट्स, कोठियों और लग्जरी गाड़ियों का ब्यौरा जुटाया। सीआईडी की इस सक्रियता ने ट्रस्ट के भीतर हड़कंप मचा दिया है। टीम ने चेयरमैन तरसेम सिंह भिंडर से भी मुलाकात की। वहीं, नामजद आरोपी हरप्रीत सिंह (पीए टू ईओ) और हरिंदर सिंह चहल शुक्रवार को दफ्तर से नदारद रहे।
हैरानी की बात यह है कि शहीद भगत सिंह नगर के 500 गज के प्लॉट की विवादित रजिस्ट्री मामले में भी हरप्रीत सिंह संधू का नाम उछल रहा है। सबसे बड़ा सवाल ट्रस्ट के चेयरमैन तरसेम सिंह भिंडर पर उठ रहा है। आरोप है कि चेयरमैन छोटी-छोटी शिकायतों पर तो तुरंत एक्शन लेते रहे हैं, लेकिन रिंपी अनेजा द्वारा दी गई आधा दर्जन से ज्यादा शिकायतों को उन्होंने ठंडे बस्ते में डाल दिया। अगर समय रहते उन शिकायतों पर गौर किया जाता, तो शायद आज एक जान बच सकती थी। अब सबकी नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई और आज होने वाले कैंडल मार्च पर टिकी हैं।

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